Atreya


Saturday, September 4, 2010

फ्रेंड+फिलॉसफर+मेंटर=टीचर शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर विशेष..
टीचर, गुरु, शिक्षक.. संबोधन कोई भी हो, सच यह है किजिंदगी को मुकम्मल बनाने में इनका बडा योगदान है। समय के साथ बहुत सी चीजें बदलती हैं, आदर-सम्मान के ढंग बदल जाते हैं, लेकिन सच्चे गुरु की जरूरत और अहमियत जीवन के हर मोड पर होती है। आइए, इन जाने-पहचाने चंद नामों के साथ शिक्षक दिवस पर हम भी याद करें अपने उन शिक्षकों को, जिन्होंने किताबी सतरों के इतर भी चंद दुनियावी सबक हमें दिए, ताकि हम जिम्मेदार नागरिक बन सकें, अपना वजूद बना सकें और अपनी जिंदगी को एक सही दिशा दे सकें।
दुनिया की हर समझ शिक्षक से ही मिली
सईं-शक्ति देवधर (टीवी एक्ट्रेस)
मेरी स्कूली शिक्षा मुंबई के सबसे बडे स्कूल पार्ले टिलक स्कूल में हुई। सभी टीचर्स अच्छे थे, लेकिन प्रभु मैम से मेरा खास लगाव था। मैं आठवीं में थी। वह इतने हलके-फुलके और रोचक ढंग से पढातीं कि सब मंत्रमुग्ध से उनकी बातें सुनते रहते। उनकी क्लास में समय का पता नहीं चलता, न पढाई बोरिंग लगती। तब हम जनरल नॉलेज की चीजें नहींपढते थे, लेकिन मैम ने हमारी जी.के. भी ठीक कर दी। विषय के अलावा देश-दुनिया की जानकारी भी वह खूब रखती थीं। उनके कारण ही पढाई व अन्य गतिविधियों में मेरी रुचि बढी।
मुझ जैसी शर्मीली लडकी को उन्होंने बोलना सिखा दिया। पिछले कुछ वर्षों से वह अपनी बेटी के पास ऑस्ट्रेलिया में हैं। मुझे सिर्फ यही दुख है कि उनसे संपर्क करने का कोई जरिया मेरे पास नहींहै। इस कॉलम के जरिये मैं उनसे कहना चाहती हूं कि मैं सचमुच उन्हें बहुत मिस करती हूं।
कार्ड देकर कहूंगी हैप्पी टीचर्स डे!
अविका राजगोर (धारावाहिक बालिका वधू की आनंदी)
हर वह व्यक्ति मेरे लिए गुरु है, जिनसे मैं कुछ सीखती हूं। प्रिंसिपल मैम, क्लास टीचर, पापा-मम्मी सभी ने मुझे सिखाया है। क्लास टीचर मेहनत करने और अनुशासित जीवन जीने को प्रेरित करती हैं, तो मम्मी प्रैक्टिकल लाइफ एंजॉय करना सिखाती हैं। पापा मुझे डायलॉग रटाते हैं। सेट पर चाय-पानी पिलाने वाले ब्वॉय से मैं सेवाभाव सीखती हूं।
मैं टीचर्स डे पर अपने सभी टीचर्स से कहना चाहती हूं कि मैं उन सभी से बहुत प्यार करती हूं और अगर मुझसे कभी कोई गलती हुई हो तो प्लीज मुझे माफ कर दें। मैंने टीचर्स के लिए ग्रीटिंग का‌र्ड्स तैयार किए हैं, जिन्हें फ्लॉवर्स के साथ उन्हें देकर हैप्पी टीचर्स डे कहूंगी। पिछले साल मैं शैरोन इंग्लिश हाई स्कूल में थी। वहां टीचर्स डे पर फेवरिट टीचर के लिए फूड बनाने का कंपिटीशन हुआ था। मैंने उसमें सेकंड प्राइज जीता था।
बालिका वधू के दौरान सभी शिक्षकों ने मुझे सहयोग दिया। कभी यह नहीं जताया कि इससे मेरी पढाई का नुकसान हो सकता है। हालांकि मैंने भी यह ध्यान रखा कि स्कूल कभी स्किप न करूं।
मेरी हर समस्या का हल है टीचर के पास
अविनाश मुखर्जी (धारावाहिक बालिका वधू के जगदीश)
मैं मुंबई के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढता हूं। वहां की प्रिंसिपल अंजनि बोवेन मेरी आदर्श टीचर हैं। मैं उन्हें अंजनि मिस कहकर बुलाता हूं। वह बहुत स्वीट हैं। देखने में सख्त-मिजाज, लेकिन अंदर से नरम। मेरा पढने में मन नहीं लगता, लेकिन जब वे कोई स्पेशल क्लास लेती हैं तो मैं मिस नहीं करता।
उन्होंने मुझे क्लास का डिसिप्लिन इंचार्ज बनाया है। मैं जब सीरियल में काम नहीं करता था, तब भी वे मुझे प्यार करती थीं। मैं जब किसी समस्या में फंसता हूं तो उन्हीं के पास जाता हूं। वह मुझे प्यार से अपने पास बैठाती हैं और एक पल में मेरी समस्या का अंत कर देती हैं। अंजनि मिस को मैं अपनी सेकंड मॉम मानता हूं। मैं उनका बहुत आदर करता हूं। आज भले ही मैं पॉपुलर हो गया हूं, लेकिन वह मुझे अन्य बच्चों की ही तरह मानती हैं। गलती करने पर मुझे डांट भी पडती है। एक दिन वह क्लास में आई और मेरी ओर इशारा करके कहने लगीं, मैं जानती हूं कि तुम आजकल क्या कर रहे हो? मैं बहुत डर गया कि पता नहीं मैम को क्या पता चला है। बाद में उन्होंने बताया कि वह मेरे शो की बात कर रही थीं। उस वक्त बालिका वधू में मेरा किरदार जगदीश सिगरेट पीना सीख रहा था। अंजनि मिस सभी बच्चों की फ्रेंड हैं। कभी-कभी वह हमारे साथ गेम में हिस्सा लेती हैं और हमारा उत्साह बढाती हैं। मैं जब कभी न्यूज पढता-सुनता हूं कि फलां टीचर ने अपने स्टूडेंट की जमकर पिटाई की तो मुझे दुख होता है। हमारी टीचर्स तो कभी ऐसा नहीं करतीं। मैंने दोस्तों के साथ योजना बनाई है कि टीचर्स डे पर स्कूल की सभी टीचर्स को विश करेंगे और उन्हें ग्रीटिंग कार्ड देंगे। अपनी फेवरिट मिस के लिए तो मैं कोई खास तोहफा ले जाऊंगा।
मेरी जिंदगी ही बदल दी टीचर ने
आरजू गोवित्रीकर (मॉडल-अभिनेत्री)
मां के बाद मेरे आध्यात्मिक गुरु श्री मुंगले महाराज जी, दीदी डॉ.अदिति गोवित्रीकर और मिस आशा सादरानी का मुझ पर गहरा प्रभाव है। पनवेल के प्रसिद्ध स्कूल दाव में मैंने पढाई की। घर में सबसे छोटी थी। शरारतों में तेज, लेकिन पढाई में कमजोर। कई बार मेरे पेरेंट्स को मेरी हरकतों के कारण स्कूल में बुलाया गया। यह सब पहले स्टैंडर्ड से तीसरी क्लास तक चला। डैड को उनके एक सहकर्मी ने अपनी पत्‍‌नी के बारे में बताया, जो टीचर थीं और कई बच्चों को सुधार चुकी थीं। इस तरह मेरी जिंदगी में आशा मिस आईं, जिन्होंने मुझे दसवीं तक पढाया। सच कहूं तो जिंदगी की दिशा ही बदल दी उन्होंने। मैं पढाई में रुचि लेने लगी, साथ ही निजी जीवन में भी गंभीर हो गई। दुर्भाग्य से अब उनसे मेरा कोई संपर्क नहीं है। लेकिन अपनी जिंदगी को सही दिशा देने के लिए मैं हमेशा उनकी आभारी रहूंगी। टीचर्स से अब भी मिलता हूं
आमिर खान (अभिनेता)
अम्मी बताती हैं कि छोटा था तो स्कूल जाते वक्त बहुत रोता था। सब परेशान रहते कि कब रोने-धोने का नाटक बंद करके खुशी से स्कूल जाऊंगा। लेकिन धीरे-धीरे मैं टीचर्स के करीब आता गया।
सेंट ऐन्स स्कूल में के.जी. से सातवीं कक्षा तक पढने के बाद बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल में मेरा एडमिशन हुआ। मुझे आज का आमिर खान बनाने में इन दोनों स्कूलों का बहुत योगदान है। लेकिन ठहरिए, स्कूल से भी पहले हैं मेरे माता-पिता। अम्मी मेरी पहली गुरु हैं। मैंने बचपन से ही बतौर चाइल्ड एक्टर काम शुरू कर दिया था। फिल्मों में काम करने के कारण स्कूल में काफी लोकप्रिय था, लेकिन मैंने पढाई को कभी दोयम दर्जे पर नहीं रखा। कोशिश की कि अभिनय के कारण पढाई को पीछे न करूं। लिहाजा टीचर्स मुझे प्यार करते थे। आगे चलकर फुटबॉल खेलने लगा तो पी.टी. सर का भी लाडला हो गया। लैंग्वेज की पढाई कुछ मुश्किल जरूर लगती थी मुझे। आज भी कुछ शिक्षकों से मिलता हूं। स्कूल के सालगिरह पर मुझे आमंत्रित किया गया तो मैं बहुत खुश हुआ। मराठी सीखने के लिए मैंने अपने टीचर सुहास लिमये से संपर्क किया, जिन्होंने मुझे फिर से पढाया। आज मैं ठीक-ठाक मराठी बोलता हूं। मैं सभी शिक्षकों का आभारी हूं। जब भी उनके मार्गदर्शन की जरूरत होती है, बेहिचक उनके पास जाता हूं। टीचर्स डे पर यही कहूंगा कि इस रिश्ते की पवित्रता को बनाए रखें।
इंटरव्यू: मुंबई से पूजा सामंत, रघुवेंद्र सिंह
सखी प्रतिनिधि
( दैनिक जागरण )

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