Atreya


Friday, January 21, 2011

अब बाजार में आया 150 रुपए का सिक्का






 


यूं तो आमतौर पर सिक्कों को इस्तेमाल बेहद छोटे लेन देन में ही किया जाता है। इसकी वजह है कि भारत में अब तक सबसे ज्यादा वैल्यू का सिक्का दस रुपए तक का ही है। लेकिन आने वाले दिनों में आप सिक्के का इस्तेमाल थोड़े बड़े लेनदेन में भी कर सकेंगे। दरअसल अब रिजर्व बैंक ने 150 रुपए के सिक्के भी जारी कर दिए हैं। यानी अगर आपके पास 150 रुपए के दस सिक्के होंगे तो इसकी वैल्यू 1500 रुपए हो जाएगी।

 

आपको बता दें कि 150 रुपए का सिक्का रवींद्र नाथ टैगोर की 150 वीं जयंती पर भारतीय रिजर्व बैंक ने जारी किया है। कोलकता स्थित भारत सरकार के टकसाल में बना यह सिक्का 35 ग्राम का है, इसमें 50 फीसदी चांदी, 40 फीसदी तांबे के अलावा पांच-पांच फीसदी निकिल और जिंक का इस्तेमाल किया गया है। इस सिक्के के ऊपरी हिस्से में अशोक चिन्ह के अलावा सत्यमेव जयते दर्ज है, कुल मिलाकर ऊपरी हिस्सा अन्य सिक्कों जैसा ही है, मगर पिछले भाग पर रवींद्र नाथ टैगोर का चित्र दर्ज है। ( दैनिक भास्कर )

Saturday, January 15, 2011

अपने करियर को दें फिनिशिंग टच

 
 

धीरज और समीर ने ग्रेजुएशन करते हुए एक मैनेजमेंट कोर्स करने का फैसला किया। दोनों ने एक प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थान में दाखिला लिया। उन्हें स्पेशलाइजेशन के लिए मार्केटिंग को चुना। समीर ने ट्रेडिंग स्किल्स का एक छोटा सा कोर्स करते हुए ग्राहकों के साथ डील करने की कला भी सीख ली। कैंपस सेलेक्शन के वक्त दोनों को एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सालाना ४ लाख रुपए के पैकेज पर नियुक्ति मिल गई। छह महीने बाद ही समीर को पदोन्नत कर असिस्टेंट मैनेजर बना दिया गया और उसका सेलरी पैकेज भी साढ़े छह लाख रुपए हो गया। आखिर समीर इतनी जल्दी इस उच्च पोजीशन पर कैसे पहुंच गया? यह सॉफ्ट स्किल्स की स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग ही थी, जिसने समीर को आत्मविश्वासी और परफॉर्मेस ओरिएंटेड बनाया।

करियर के शुरुआती स्तर पर बेहतर एसाइनमेंट्स पाने के लिए तकनीकी योग्यताएं अहम होती हैं। लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि कॅरियर पथ पर तेजी से आगे बढ़ने के लिए व्यक्ति की संप्रेषण योग्यता व व्यावहारिक कौशल भी मायने रखता है। यहां कुछ ऐसी स्किल्स के बारे में बात की जा रही है, जिन्हें छात्र कारपोरेट जगत में उतरने से पहले आत्मसात कर लें तो बेहतर है।

करियर गाइडडेस

जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में सीनियर लेक्चरर डॉ. शीनू जैन पेशेवर जगत में आगे बढ़ने के लिए सॉफ्ट स्किल्स के महत्व के बारे में बता रही हैं।

व्यक्तिगत खूबियां

अनौपचारिक बातचीत से लेकर औपचारिक प्रजेंटेशनों के लिए भी अपनी संप्रेषण क्षमता में सुधार करें।

सामाजिक शिष्टाचार व सदाचरण का ध्यान रखें और दूसरों के साथ संयत व्यवहार करें।

कारपोरेट कम्युनिकेशन

इंटर-ग्रुप व इंट्रा-ग्रुप कम्युनिकेशन स्किल्स को प्रभावी बनाएं।

अंदरूनी व बाहरी स्तर पर होने वाले बिजनेस कम्युनिकेशन का स्तर बढ़ाएं।

फॉर्मल प्रजेंटेशन बनाएं।

करियर ग्रोथ

अपनी खूबियां, खामियां और कॅरियर संबंधी अवसर व जोखिम को अच्छी तरह पहचानें और उसी के मुताबिक निर्णय लें।
किसी खास पेशे के लिए जरूरी एटीट्यूड का खुद में विकास करें। ( दैनिक भास्कर )



                                                                       *




.

Sunday, January 2, 2011

नववर्ष 2011 मंगलमय हो 

 

 

 

 

 

     

नववर्ष 2011 मंगलमय हो!
जनवरी: नई चुनौतियों के लिए हो जाएं तैयार
हर नया दिन एक नई चुनौती के साथ शुरू होता है, हर नया समय नए संघर्ष का साक्षी होता है। नए वर्ष में बीती बातों को भुलाकर नए सपनों के साथ एक ताजा शुरुआत करें। बेफिक्र, बेखौफ और बेतकल्लुफ होकर नए वर्ष का आगाज करें।
 

लक्ष्य: जनवरी
कहते हैं आगाज अच्छा हो तो अंजाम भी बेहतर होता है। खुश रहें और दूसरों को भी खुशियां बांटें। किसी रोते हुए को हंसा दें, किसी नाउम्मीद के दिल में आशा की नन्ही सी किरण ढूंढें, किसी जरूरतमंद की थोडी सी मदद कर दें। यही तो जिंदगी है! आपका नया वर्ष मंगलमय हो!
चुनौतियों को स्वीकार करना ही सफलता की कुंजी है। जिस दिन व्यक्ति ऐसा नहीं करेगा, वह मर जाएगा।
नई उमंगों, नई तरंगों, नए संकल्पों और नए ख्वाबों से लबरेज एक नई सुबह रात के अंधेरे को चीरकर हमारे आंगनों में उतरने लगी है। फिर दीवारों ने बदले हैं कैलेंडर, चिडियों के राग मधुर हो गए हैं। समूची कायनात नए अंदाज में नजर आ रही है। शोर-शराबे, धूम-धडाके और मौज-मस्ती के बीच नए साल का आगाज हो गया है। ऐसे में चुप क्यों रहें। क्यों न कोई नई धुन बनाएं और कुछ गुनगुनाएं। कोई नई राह ढूंढें और शब्दों को कोई नए अर्थ दें।
नई खुशियां हैं तो नई चिंताएं भी हैं, नई इच्छाएं हैं तो चुनौतियां भी। नई जंग के लिए कमर कसें और कुछ नए संकल्प लें।
 

कार्य का नया ढंग
निजी विकास के लिए जरूरी है कि जीवन में नई चुनौतियां लें। नए लोगों के साथ काम करें। भिन्न स्वभाव, दृष्टिकोण और अनुभव वाले लोगों के साथ काम करने से बडी चुनौती दूसरी नहीं है। सामाजिक भय से मुक्त होकर नए दृष्टिकोण के साथ खुद से बिलकुल भिन्न व्यक्तियों के साथ काम करके देखें। इस चुनौती को स्वीकारें, नए एहसास आगे बढने को प्रेरित करेंगे।
 

जिम्मेदारी और नेतृत्व
सफलता मेरी है तो विफलता के लिए भी मैं ही जिम्मेदार हूं। इस सच को स्वीकार करें। घर-बाहर की जिम्मेदारियों का निर्वाह टीम भावना से करना महत्वपूर्ण है। टीम का अर्थ यह है कि सबके विचार सुने जाएं और सर्वसम्मति से सही निर्णय तक पहुंचा जाए। कभी कूटनीति से तो कभी स्पष्टता से बात कहने का तरीका भी समूह में काम करने के दौरान ही आता है।
 

विविधता का आनंद
कहते हैं, विविधता जिंदगी को ज्यादा जीवंत बनाती है और एकरसता उसे उबाऊ बना देती है। सबका मकसद खुशी पाना है और खुशी काम से मिलती है। अलग-अलग तरह के काम करना, कठिन कार्यो को चुनौती की तरह स्वीकार करना और इन सबके बीच मनोरंजन के पलों का आनंद उठाना ही खुश रहने का मंत्र है।
 

सच को स्वीकारें
क्या हम अपनी योग्यता, क्षमता, सीमा और गुणों-अवगुणों को पहचानते हैं? खुद को हम वास्तविकता में जानते हैं या अपनी आदर्श छवि हमने मन में बना रखी है? बाइबिल में कहा गया है, सत्य आत्मा को स्वतंत्र करता है। खुद की सही तसवीर देखें। यदि हम बदलाव चाहते हैं तो तथ्यों को वैसे स्वीकारें जैसे कि वे हैं, न कि जैसा हम उन्हें देखना चाहते हैं। तभी हम खुद में अपेक्षित परिवर्तन कर पाएंगे।
 

जो बीत गई सो बात गई
नॉस्टैल्जिक होना बुरा नहीं है, लेकिन अतीत में जीना और उसे ढोना बुरा है। हिंदी के प्रसिद्ध कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की एक पंक्ति है, लो अतीत से उतना ही जितना पोषक है..। बीते वर्ष कुछ अच्छा किया है तो उसे उभारें। गलतियां हुई हैं तो उनसे सबक लें, उन्हें आइंदा न दोहराएं। मनुष्य ही गलतियां करता है और उन्हें सुधारने की कूवत भी उसमें ही है।
 

समय कभी रुकता नहीं
समय प्रबंधन सबसे बडी जरूरत है आज की। समय किसी के लिए नहीं रुकता। इसलिए सही समय पर सही निर्णय लेना ही समझदारी है।
जीवन की दुश्वारियों से घबराने के बजाय उनका सामना करें। व्यावहारिक बनें, समय के साथ चलें, खुद को अपडेट रखें और सकारात्मक रहें। नई ऊर्जा, नए आत्मविश्वास और नई आशा के साथ इस नए साल का स्वागत करें।
 

हेल्दी टिप
कंप्लीट हेल्थ के लिए साल के पहले महीने की शुरुआत अनार के साथ करें। माना जाता है पाषाण-युग से ही इसका प्रयोग होता रहा है। अनार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड, फैट, फाइबर के अलावा आयरन, कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम, फोलेट, जिंक, फॉस्फोरस, विटमिन बी व सी पाया जाता है। उत्तरी भारत, रूस, ईरान, पाकिस्तान व अफगानिस्तान में यह बहुतायत से मिलता है। इंडियन-पर्शियन क्विजीन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होने के अलावा आयुर्वेद में भी इसका महत्व है। एनीमिया के उपचार में यह कारगर है।
 

फरवरी: प्यार, इश्क और मोहब्बत..
प्यार के इस महीने में अपने रिश्ते पर जरा ध्यान दें। समय के साथ जमी धूल की परतें तो हटाएं और उस नयेपन को एक बार फिर महसूस करें जिसके साथ आप कभी एक-दूसरे के करीब आए थे।
 

लक्ष्य : फरवरी
अपने फेवरिट पार्टी गाउन में फिट होने के लिए वेस्ट लाइन से कुछ इंच घटाने की कोशिश करें। प्यार, इश्क और मोहब्बत.. जी हां, यह महीना है अपने माहौल में प्यार बिखेरने का। आप शादीशुदा हों या गैर शादीशुदा, अगर रिश्ते की हैंडलिंग जरा संवेदनशील ढंग से की जाए तो बात ही कुछ और होती है। आखिर प्यार के रिश्तों की तो बुनियाद ही संवेदना है। लेकिन जीवन की आपाधापी में कई बार हम भूल जाते हैं कि हम जिसे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, उसे ही सबसे ज्यादा दुख भी पहुंचाते हैं। क्यों न प्यार के इस ऑफिशियल महीने में अपने रिश्ते में प्यार का अहसास एक बार फिर तरोताजा कर लें! सखी के कुछ सुझाव।
 

रिश्ते में स्पेस दें
रिश्ता जितना ज्यादा पुराना होता जाता है, हम भूलते जाते हैं कि दूसरे इंसान की एक व्यक्तिगत जिंदगी है। हम उस पर इस हद तक अपना अधिकार जताने लगते हैं कि स्पेस देना ही भूल जाते हैं। नई दिल्ली के मूलचंद एंड मेडिसिटी हॉस्पिटल की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कौर कहती हैं, यह बात सही है कि कमिटमेंट में एक-दूसरे को जानने और एक-दूसरे पर अधिकार जताने की कोई लिमिट नहीं होती, लेकिन इस दौरान लोग अकसर यह भूल जाते हैं कि वे एक-दूसरे के निजी स्पेस को खत्म कर रहे हैं। ऐसे में इंसान अपनी वह पर्सनैलिटी खो देता है जिसे कभी आपने चाहा था और उसकी शख्सीयत धीरे-धीरे वैसी बनती जाती है जैसा आप उसे देखना चाहते हैं। उसकी पर्सनैलिटी की मौलिकता खत्म होती जाती है और बोरियत घर करने लगती है। क्यों न इस बार रिश्ते में जरा स्पेस देकर देखा जाए.. शायद आपके रिश्ते की बोरियत खत्म की जा सके!
 

डॉमिनेट करने से बचें
अकसर देखा जाता है कि विपरीत शख्सीयतों के लोग एक-दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं। एक एक्सट्रोवर्ट होता है तो दूसरा इंट्रोवर्ट। एक्सट्रोवर्ट लोगों की पर्सनैलिटी ही कुछ इस तरह की होती है कि वे अपने पार्टनर को न चाहते हुए भी डॉमिनेट करने लग जाते हैं। अगर आपकी शख्सीयत कुछ ऐसी है तो आपको खुद को चेक करने की जरूरत है।
 

अनुचित अपेक्षाओं से बचें
यह बात सही है कि आप अपने पार्टनर से उम्मीद नहीं करेंगे तो किससे करेंगे, लेकिन अनुचित अपेक्षाएं कई बार रिश्ते के लिए घातक होती हैं। डॉ. गगनदीप कहती हैं, चांद-तारे तोडने की अपेक्षाएं केवल फिल्मों में ही अच्छी लगती हैं। प्यार को साबित करने जैसी असंभव मांगों से बचें।
 

जरा रोमांटिक हो जाएं..
वैलेंटाइंस डे का महीना है, क्यों न इस महीने में एक बार फिर अपने प्यार के पलों को रिवाइज कर लिया जाए। उसी नए-नए प्यार की रूमानियत को एक बार फिर जी ली जाए जब आप दोनों रोमैंटिक कैंडल-लाइट डिनर पर जाया करते थे, इंस्ट्रुमेंटल म्यूजिक पर डांस किया करते थे और एक ही कोन से आइसक्रीम शेयर किया करते थे। क्यों न उन पलों को एक बार फिर जी लिया जाए.. रिश्ते की वह रौनक एक बार फिर लौट आएगी।
 

मार्च: दूर हो अपनों की नाराजगी
कई बार न चाहते हुए भी आपके अपने आपसे रूठ जाते हैं, ऐसे में सारे गिले-शिकवे भुला कर नई शुरुआत में ही समझदारी है। इस महीने आने वाला होली का त्योहार भी तो यही संदेश देता है। तो फिर देर किस बात की, इस महीने आप सखी के साथ संकल्प लें अपनों की नाराजगी दूर करने का।
 

लक्ष्य : मार्च
मार्च के महीने में अपने पारिवारिक बजट में कुछ ऐसे संशोधन करें ताकि अगले महीने बढने वाली कीमतों से आपकी जीवनशैली प्रभावित न हो। अगर इस महीने में आपके बच्चे के बोर्ड एक्जैम हैं तो उसकी तैयारी में अपना पूरा सहयोग दें। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोडो चटकाय।
टूटे से फिर न जुडे, जुडे तो गांठ पड जाय।
किसी भी रिश्ते के मामले में रहीम का यह दोहा आज भी बेहद सटीक प्रतीत होता है। अगर कभी आपके साथ ऐसा हो भी जाए तो जल्द से जल्द अपने बिगडे हुए रिश्ते को सुधारने की कोशिश करें। यहां आपकी सुविधा के लिए मनोवैज्ञानिक सलाहकार डॉ. अशुम गुप्ता से हुई बातचीत के आधार पर सखी आपको रिश्तों से जुडी कुछ समस्याएं और उनका समाधान दे रही है, ताकि आप अपने बिखरे हुए रिश्ते में सुधार ला सकें।
 

नाजुक है रिश्तों की डोर
तुम मुझे कभी फोन नहीं करते, तुमने मुझे जन्मदिन की बधाई क्यों नहीं दी? तुम कभी भी हमारे घर नहीं आते, मैं बीमार था/थी तब तुमने मेरा हाल क्यों नहीं पूछा? हो सकता है कि आपके रिश्तेदार भी अकसर यह शिकायत करते हों तो ऐसी स्थिति में..
 

दोस्त की सलाह :
अगर उनकी शिकायत गलत हो तो उन्हें प्यार से उनकी गलती का एहसास कराएं लेकिन उनकी बातों पर ओवर रिएक्ट न करें। अगर आपको उनकी शिकायत जायज लगे तो बेझिझक माफी मांग ले। रिश्तेदारी में औपचारिकता बहुत मायने रखती है। अगर कोई व्यक्ति रिश्ते में आपसे बडा है और वह आपसे नाराज है तो अपनी गलती न होने पर भी माफी मांग लें। ऐसे में कोई प्यारा सा गिफ्ट देना या सॉरी नोट लिखना भी बहुत कारगर साबित होता है।
 

दोस्ती हम नहीं तोडेंगे
अगर आपके किसी दोस्त को ऐसा महसूस हो कि आपने दूसरों से उसकी शिकायत की है, मुसीबत के वक्त उसकी मदद नहीं की या जानबूझ कर उसकी भावनाओं को ठेस पहुंचाया है, आदि। तो ऐसी स्थिति में..
 

दोस्त की सलाह : 
अगर आपकी दोस्ती में कुछ ऐसा हो तो बिना देर किए अपने दोस्त को प्यार से मना लें और खुद भी उसकी बातों को दिल पर न लें, जहां तक संभव हो उसकी गलतियों को माफ कर दें क्योंकि जिंदगी में अच्छे दोस्त बहुत मुश्किल से मिलते हैं।
 

कैसा हो प्रोफेशनल संबंध
ऑफिस में सहकर्मियों के साथ आपसी रिश्ता थोडा पेंचीदा होता है। इसमें सम्मान और दूरी बनाए रखना बहुत जरूरी है। अगर ऑफिस में सहकर्मियों के साथ किसी तरह का मतभेद या गलतफहमी हो तो ऐसी स्थिति में..
 

दोस्त की सलाह :
किसी भी विवाद को जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश करें क्योंकि कार्यस्थल के वातावरण पर इसका नकारात्मक प्रभाव पडता है। अपना व्यवहार संयत रखते हुए कामकाज के लिए सहज और सहयोगपूर्ण माहौल बनाए रखने की कोशिश करें। यह आपकी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ दोनों के लिए फायदेमंद होगा।
सुख-दुख के साथी पडोसी अगर कभी आपकी लापरवाही या पडोसी की किसी नासमझी की वजह से आपके बीच अनबन हो जाती है तो ऐसी स्थिति में..


दोस्त की सलाह :
अगर पडोसी आपसे नाराज हों तो सबसे पहले ईमानदारी से पूरे प्रकरण को समझें कि आपकी ओर से क्या गलती हुई है और उसे सुधारने की कोशिश करें। क्योंकि पडोसियों से होने वाले विवाद में लोग अकसर अपनी गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार बच्चों के छोटे-छोटे झगडे, आपके घर में होने वाले शोर या पालतू जानवर पडोसियों की नाराजगी का कारण बन जाते हैं। अगर ऐसी किसी वजह से पडोसी आपसे नाराज हैं तो अपनी गलतियों को सुधार कर, जितनी जल्द हो सके उनके साथ सुलह कर लें क्योंकि पडोसी ही आपके सुख-दुख के सच्चे साथी होते हैं।
 

हेल्दी टिप
अंगूर इस बदलते मौसम में मिलने वाला ऐसा फल है, जिसमें मौजूद विटमिन सी हमें सर्दी-जुकाम से बचाता है। शोध से यह प्रमाणित हो चुका है कि अंगूर हृदय और किडनी से संबंधित बीमारियों से भी बचाव करता है। इसमें थके हुए शरीर को तुरंत एनर्जी देने वाले तत्व पाए जाते हैं।
 

अपै्रल: जॉब मार्केट के नए रूल्स
अप्रैल का महीना है प्रोफेशनल जिंदगी को बेहतर बनाने का। जॉब मार्केट में पिछले कुछ वर्र्षो में बहुत बदलाव आ गया है। सफलता के पैमाने भी बदल गए हैं। जानिए करियर में आगे बढने के कुछ नए रूल्स।
 

लक्ष्य : अप्रैल
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर रखें, खुद को अपडेट करें। काम के लिए जरूरी टेक्निकल स्किल हासिल करें। पर्सनल ग्रूमिंग करें।
अब है करियर के बारे में सोचने का समय। हाल के कुछ वर्षो में जॉब मार्केट की स्थितियां बहुत बदली हैं। आगे बढने के लिए कुछ नए नियमों का पालन जरूरी हो गया है।
 

कंफर्ट जोन से बाहर निकलें
करियर में विकास की पहली शर्त है-हर नई चीज सीखने को तैयार रहें। हर वर्ष प्रतिभाशाली युवाओं की नई खेप मार्केट में आ रही है। ऐसे में अपने फील्ड में महारत हासिल करना, चुनौतियां स्वीकार करना और कंफर्ट जोन से बाहर आना ही करियर में सफलता दिला सकता है।
 

काम में रुचि ढूंढें
क्या आप अपने काम से प्यार करते हैं? अगर आपको मनपसंद काम मिला है तो भाग्यशाली हैं। यदि नहीं मिला तो भी उसे चुनौती मानकर स्वीकार करें। यहां लव मैरिज व अरेंज्ड मैरिज का उदाहरण दिया जा सकता है। लव मैरिज में शुरुआत ही प्रेम से होती है, जबकि अरेंज्ड मैरिज में प्रेम धीरे-धीरे पैदा किया जाता है। इसी तरह काम किसी भी तरह का हो, उसके प्रति लगाव पैदा करना, उसमें अपनी रुचि खोजना व्यावहारिक समझदारी है।
 

पॉलिटिकली करेक्ट क्यों
हमेशा पॉलिटिकली करेक्ट नहीं रहा जा सकता। कभीकभार साफगोई भी जरूरी है। फिल्म थ्री इडियट में राजू (शरमन जोशी) जब इंटरव्यू बोर्ड को अपनी जीवन-स्थितियों के बारे में सब-कुछ सच बताता है तो बोर्ड मेंबर्स कुछ पल के लिए खामोश रह जाते हैं कि एक ऐसा व्यक्ति जो ईमानदारी और साफगोई से अपने बारे में बता रहा है, कंपनी के हक में सही साबित होगा! लेकिन बाद में वे उसे वापस बुलाते हैं। अब कंपनियां भी ऐसे लोगों को पसंद करती हैं, जो निडर होकर अपनी बात रख सकें ।
 

काम का माहौल बनाएं
सहकर्मियों व बॉस के बीच गरिमापूर्ण संबंध जरूरी है। बॉस से संबंध अच्छे नहीं हैं तो काम का माहौल बेहतर नहीं हो सकता। सकारात्मक वातावरण में ही अच्छा काम संभव है, इसलिए छोटी-छोटी बातों को तूल न देकर समझदारी से गलतफहमियां दूर करनी चाहिए।
 

फल की इच्छा भी करें
गीता में श्रीकृष्ण ने कहा था, कर्म करो, फल की इच्छा मत करो। यह आदर्श स्थिति व्यावहारिक संसार में संभव नहीं है। कठिन मेहनत के बावजूद यदि सही रिजल्ट न मिले तो कुंठाएं पैदा होती हैं। ऐसी स्थितियां लगातार जारी हों तो खुद का मूल्यांकन करना जरूरी है। वरिष्ठ अधिकारियों के सामने भी अपनी बात रखी जानी चाहिए।
 

रिज्यूमे हो आकर्षक
दौर खूबसूरत पैकिंग का है। अपने सी.वी. को आकर्षक क्यों न बनाएं! कोई भी संस्थान महज एक इंटरव्यू में व्यक्ति को नहीं जान सकता। सही डिटेल्स रिज्यूमे द्वारा ही पता चलती हैं। सही रिज्यूमे के प्रति सभी आकर्षित होते हैं। खुद तैयार न कर सकें तो एक्सपर्ट की मदद लें।
 

काम से हो काम
काम, काम और काम...भरोसा सिर्फ अपने काम पर रखें। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। कठिन मेहनत से ही व्यक्ति मंजिल तक पहुंच सकता है। अंतत: काम ही बोलता है, इसलिए सिर्फ अपने काम से ही काम रखें।
 

मई: थोडा समय ही तो मांगते हैं बच्चे
प्रोफेशनल जिंदगी पर ध्यान देने के बाद पेरेंटिंग की बारी आती है। बच्चे माता-पिता का समय चाहते हैं। व्यस्त जीवनशैली में जोर इस बात पर है कि बच्चों को क्वॉलिटी टाइम मिले। मई महीने में स्कूलों की छुट्टियां शुरू हो जाती हैं, इसलिए बच्चों से बेहतर संवाद के लिए कोशिश भी इस समय की जा सकती है।
 

लक्ष्य : मई
बच्चों के साथ हर स्थिति में संवाद बनाए रखें। कई बार टीनएजर्स पलटकर जवाब देते हैं और पेरेंट्स समझ नहीं पाते कि क्या करें। घबराएं नहीं और कुछ चीजें समय पर छोड दें। क्रोध में ऐसा कुछ न बोलें कि पछतावा हो।
दो वर्ष पूर्व भारत में एसोचैम के सोशल डेवलेपमेंट फाउंडेशन (एएसडीएफ) द्वारा कराए गए एक सर्वे के मुताबिक वर्किग कपल्स अपने बच्चों को दिन भर में महज 30 मिनट ही दे पाते हैं। यह रेंडम सर्वे कई कंपनियों के 3000 वर्किग कपल्स पर कराया गया। नतीजे में पाया गया कि एक कामकाजी स्त्री ऑफिस में 8-10 घंटे, आने-जाने में ढाई-तीन घंटे, कुकिंग व अन्य कार्यो में चार घंटे, सोने में 6-7 घंटे बिताती है। इस दिनचर्या में बच्चों के लिए केवल 30 मिनट का समय ही रहता है। कामकाजी पुरुष 11-12 घंटे ऑफिस, लगभग दो घंटे ट्रैवलिंग, एकाध घंटे टीवी देखने और 7-8 घंटे नींद में बिताते हैं। यह तो संभव नहीं है कि 24 घंटे उनके साथ रहा जाए, लेकिन अपनी दिनचर्या में थोडी फेरबदल करके कुछ वक्त बच्चों के साथ अवश्य बिताना चाहिए। कुछ टिप्स इसके लिए-
 

ब्रेकफस्ट साथ करें
सुबह का नाश्ता साथ करें। डाइनिंग टेबल पर उनके दिन भर के कार्यक्रम पर बातें करें या उन्हें मजेदार टास्क करने को दें। यदि उन्हें पेड-पौधों में रुचि है तो इससे संबंधित कार्य उन्हें सौंपें। शाम के लिए भी कोई मनोरंजक कार्यक्रम अभी तय कर लें, ताकि बच्चे दिन भर उत्साहित रहें।
 

घरेलू कार्यो में मदद लें
छुट्टी के दिन घरेलू कार्यो में उनका सहयोग लें। साथ काम करने और बातें करने का मजा ही अलग है। उन्हें चाय, सैंडविच, टोस्ट और जूस बनाना सिखाएं। घर की सेटिंग बदलने, डस्टिंग या अन्य कार्यो में उनका सहयोग लिया जा सकता है। इससे उनमें घरेलू कार्यो के प्रति सम्मान की भावना पैदा होगी, साथ ही आप उनके साथ ज्यादा वक्त बिता सकेंगे।
 

बेड टाइम फन
रोज टीवी देखते हुए खाना और फिर सो जाना निहायत बोरिंग है। बच्चों की खातिर इस आदत को बदलें। क्या उन्हें कहानियां सुनने का शौक है? वे म्यूजिक लवर हैं? चैस जैसे गेम्स उन्हें अच्छे लगते हैं? डिनर और सोने के बीच एक-डेढ घंटे के इस अंतराल में बच्चों की रुचियां जगाएं। यकीनन आपको भी उनकी कॉमिक बुक्स पढने में मजा आएगा।
 

फेमिली आउटिंग
रविवार का दिन आउटिंग के लिए रखें। कॉफी-स्नैक्स व फुटबॉल लें और निकल जाएं किसी पार्क या पिकनिक स्पॉट पर। मौज-मस्ती करें, वॉटर गेम्स खेलें, बोटिंग करें, पार्क में फुटबाल या वॉलीबाल खेलें। बच्चों को मजा आएगा, साथ ही आपको भी ताजगी का एहसास होगा।
 

दोस्तों को घर बुलाएं
बच्चों के दोस्तों को अपना दोस्त बनाकर देखें, उन्हें कभी घर बुलाएं। आपको पता चल जाएगा कि बाहर की दुनिया में क्या चल रहा है। बाजार में कौन सा नया मोबाइल आया है! फैशन में क्या इन है और क्या आउट! ट्विटर पर क्या नई ट्वीट आई है और किस सॉफ्टवेयर से ऑफिस के काम आसान हो सकते हैं..!
 

टाइम मैनेजमेंट
टाइम मैनेजमेंट का पेरेंटिंग में भी खासा महत्व है। एकल परिवार में यदि दो छोटे बच्चे हैं तो समय को ऐसे बांटा जा सकता है कि पति छोटे बच्चे को बाहर घुमा लाए और पत्‍‌नी बडे बच्चे का होमवर्क करा दे। घरेलू कामों को बांट लें ताकि पति-पत्‍‌नी दोनों बच्चों को समय दे सकें। बच्चे थोडा बडे हैं तो उन्हें सुबह थोडा जल्दी जगाएं। उनके साथ वॉक पर जाएं। इससे कुछ समय उनके साथ बिताने का मौका मिलेगा, साथ ही सुबह की ताजा हवा व ऑक्सीजन भी उन्हें मिल सकेगी।
 

हेल्दी टिप
नेत्र-रोगों व दिमाग दोनों के लिए पालक जरूरी है। कोलोन, प्रोस्टेट व ब्रेस्ट कैंसर सहित स्ट्रोक, डाइमेंशिया, लो ब्लडप्रेशर में यह फायदेमंद है। हार्ट अटैक की आशंका को कम करता है। हड्डियों के विकास के लिए जरूरी है। इसमें आयरन, विटमिन ए, सी, के, फोलेट, मैग्नेशियम, ल्यूटिन व कैल्शियम मिलता है।
 

जून: सैर कर दुनिया की गाफिल..
अभी तक आपने जो कुछ किया उस सब के केंद्र में दुनिया थी और दुनिया को महत्व देने के फेर में आप खुद अपने केंद्र से हट जाते हैं। जून का महीना बच्चों की छुट्टियों का होता है। बेहतर होगा कि इसे आप खुद को अपने केंद्र से जोडने का अवसर बनाएं। खुद को दुनिया में खपाने के बजाय दुनिया देखने में लगाएं और अपने होने का पूरा लुत्फ उठाएं।
 

लक्ष्य : जून
अब तक घूमने की इच्छा तो हो ही चुकी होगी। इस बार क्यों न कुछ अनजानी जगहों की सैर करने का मन बनाया जाए। दूर न हो सके तो आसपास की जगहों की ही सैर करें, जो अकसर सिर्फ इसलिए छूट जाती हैं कि उन पर ध्यान नहीं जाता।
जनवरी में नई चुनौतियां, फरवरी में निजी और मार्च में सामाजिक रिश्ते, अप्रैल में अपने और फिर मई में बच्चों के भविष्य की फिक्र.. इस पूरे क्रम में होता क्या है? लगातार श्रम, दौडभाग, तनाव.. आपकी निजी उपलब्धि सच पूछिए तो यही होती है। यकीन मानिए, आगे यानी साल के सेकंड हाफ में भी आपको आपके लिए कुछ और मिलने नहीं जा रहा है। अगर आप चाहते हैं कुछ वक्त सचमुच सेलब्रेट करना, तो इसके लिए जून के महीने से बेहतर दौर मिलने वाला नहीं है। यही वह वक्त है, जब बच्चों की छुट्टियां होती हैं। बच्चों की छुट्टी हो तो अलस्सुबह उन्हें तैयार करने में होने वाली भागदौड से आपको भी राहत। ऐसे वक्त में अगर आप घर बैठे तो आपका मूड रोजमर्रा कामकाज की ऊब से बाहर नहीं निकल सकेगा। इसलिए सबसे अच्छा यही होगा कि लीजिए कुछ दिनों की छुट्टी और निकल पडिए किसी भी तरफ।
एक ही जगह लगातार रहते, एक ही जैसी चीजें देखते, एक ही रास्ते पर आते-जाते और एक ही जैसा काम करते-करते कोई भी एकरसता का शिकार हो जाता है। यह पहले तो आपको ऊब से भरती है और फिर तनाव की ओर ले जाने लगती है। बाद में अरुचि का कारण बनती है, जिसका असर परफॉर्मेस पर पडता है। जाहिर है, बाद में यह आपके लिए कई मुश्किलों का कारण बन सकता है। आने वाली मुश्किलों से बचने के लिए जरूरी है बोरियत के एहसास से बाहर निकलना और उसका सबसे बढिया उपाय है पूरे सुकून के साथ सैर-सपाटा। किसी ऐसी जगह का सफर जो आप सिर्फ अपने लिए कर रहे हों। अकेले या अपने जीवनसाथी या फिर करीबी दोस्तों के साथ। इसलिए अति व्यस्तता और समय न निकाल पाने की आत्मप्रवंचना में न फंसें। बेहतर यही होगा कि जून के महीने में चाहे एक हफ्ते के लिए ही सही, आउटिंग का इंतजाम बनाएं। ताकि आप तन-मन से हो जाएं तरोताजा फिर अगले एक साल तक के लिए।
 

ऐसे बनाएं इंतजाम
वैसे यह मामला सिर्फआपकी चाहत पर निर्भर नहीं है। इसके लिए बहुत जरूरी है घर से बाहर निकलने के पहले अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए सही इंतजाम बनाना। अगर आप अकेले हैं, तब तो आपको बस निकल पडना है। जब तक दो, तीन या चार नहीं होते, तब तक आप अकेले होने का पूरा लुत्फ उठा सकते हैं। आपको जरूरत सिर्फ छुट्टियों की होगी, जिनका इंतजाम आप आसानी से कर सकते हैं। सिर्फ शादीशुदा हैं और बच्चे नहीं हैं, तो भी कोई दिक्कत नहीं। बस आपको यह देखना होगा कि जिस वक्त आप निकलना चाहते हैं, उस वक्त आपके जीवनसाथी को अवकाश मिल सकेंगे या नहीं। हालांकि यह कोई मुश्किल बात नहीं है। अगर आप थोडा पहले से सजग हों और योजनाबद्ध तरीके से चलें तो आप दोनों लोग आसानी से छुट्टियां लेकर साथ निकल सकते हैं।
थोडी मुश्किल केवल उन लोगों के लिए हो सकती है जिनके बच्चे छोटे हैं। ऐसी स्थिति में आपके लिए जरूरी है कि अपने बच्चों की पसंद-नापसंद और चाहतों पर गौर करें। आप खुद पाएंगे कि सिर्फआपका प्यार ही बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं है। ध्यान दें कि वे आपके अलावा और किन लागों के रहना पसंद करते हैं और उनमें ऐसे कौन लोग हैं, जो आपके बच्चों को खुशी से थोडे दिनों के लिए अपने साथ रखना पसंद करेंगे तथा जिन पर आप पूरा भरोसा कर सकेंगे। वे बच्चों के दादी-दादी, नाना-नानी, मौसी, बुआ या मामा भी हो सकते हैं। इस तरह बच्चों का आपके दूसरे परिजनों और रिश्तेदारों से जुडाव तो बढेगा ही, सामाजिक व्यवहार के प्रति उनकी सजगता भी बढेगी। यह उनके व्यक्तित्व के विकास में सहायक बनेगी।
बेहतर होगा कि आप उनसे पहले से बात करके रखें और यह भी गौर कर लें कि उनके लिए कौन सा समय सबसे मुफीद होगा।
फिर क्या है, बनाएं कार्यक्रम और चल दें जहां चाहें वहां के लिए। लौट कर आप खुद पाएंगे कि अब आप वही नहीं रह गए जो पहले थे। आपमें आ जाएगी नई ऊर्जा अच्छी-बुरी हर तरह की स्थितियों से जूझने के लिए।
 

जुलाई: यह मेरा समय है
पिछले महीने आपने सैर-सपाटे का आनंद तो उठाया लेकिन उसका असर आपकी त्वचा पर भी पडा होगा। ऐसे में अब जरूरी है कि आप अपने लिए समय निकालें और त्वचा को स्वस्थ सुंदर बनाए रखने के लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट लें।
 

लक्ष्य : जुलाई
तय करें कि टाइम पर थ्रेडिंग, नेल फाइलिंग, फेशियल, हेयर स्पा के साथ बैलेंस डाइट लूंगी। ताकि हर समय सुंदर और आकर्षक नजर आएं । भागदौड भरी जिंदगी, काम के लंबे घंटे, मानसिक तनाव, नींद की कमी और करियर के साथ-साथ परिवार चलाने की भी जिम्मेदारी। यानी खुद के लिए आपके पास समय नहीं होता। आप चाहें तो अपने रुटीन में ही मी टाइम शामिल कर सकती हैं। भला कैसे बता रही हैं सौंदर्य विशेषज्ञा गुंजन तनेजा।
 

एक्सफोलिएशन
दिन भर की थकावट दूर करने के लिए जिस तरह शरीर को आराम की जरूरत होती है उसी प्रकार त्वचा को भी आराम और ताजगी की आवश्यकता होती है। यह एक्सफोलिएशन के जरिये हो सकता है। हफ्ते में दो बार मिनरल ग्लो स्क्रब का इस्तेमाल करें। इससे मृत त्वचा और ब्लैक हेड्स हट जाएंगे और त्वचा स्वस्थ, चमकदार एवं मुलायम हो जाएगी।
 

एक्स्ट्रा केयर हेयर स्पा
बालों को स्टाइल में रखना आज की जरूरत है। लेकिन स्टाइल के लिए बालों को तमाम रसायनों और तकनीकी प्रक्रियाओं से गुजरना पडता है, जो उन्हें कमजोर बना देते हैं। एक्स्ट्रा केयर हेयर स्पा ऐसे बेजान और कमजोर बालों को पोषण देने के लिए किया जाता है। यह प्रोटीन और सिलिकॉन ऑयल के नए मिश्रण से तैयार किया जाता है, जो बालों को मजबूत और चमकदार बनाने में मदद करता है।
 

एएचए (अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड) फेशियल:
धूप के कारण टैनिंग की समस्या आम है। इसलिए इस माह ए.एच.ए. फेशियल से टैनिंग दूर करें। यह पिग्मेंटेशन की मसस्या भी दूर करता है। इसमें अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड से बनाए गए क्रीम और सीरम का इस्तेमाल करते हैं और इन्हें त्वचा के अंदर डालने के लिए अल्ट्रासोनिक मशीन का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद एक खास तरह का पैक लगाते हैं जिसे एंजाइम पैक कहते हैं। यह त्वचा को रिजेनरेट करने में मदद करता है। टैनिंग ज्यादा हो तो इसे हफ्ते में दो बार करा सकती हैं।
टीनएजर लडकियों के लिए फ्रूट पीलिंग इसमें त्वचा की जरूरत के अनुसार फलों का पैक इस्तेमाल करते हैं। फिर हलके हाथों से स्क्रब करते हैं। ताकि त्वचा की गहराई से सफाई हो। इसके बाद फ्रूट पैक लगाते हैं। स्क्रब करने से रक्त संचार बढता है और त्वचा के कोश सक्रिय हो जाते हैं। ब्लैक हेड्स, व्हाइट हेड्स निकल जाने से एक्ने नहीं होते।
 

क्विक मेकओवर टिप्स
1. इंस्टेंट ग्लैम के लिए ब्राइट मस्कारा लगाएं। आजकल ब्ल्यू व ग्रीन मस्कारा ट्रेंड में है।
2. लाइट ब्राउन, मैरून या गोल्डेन लिप पेंसिल हमेशा अपने पास रखें। लुक चेंज करने के लिए पहले लिप पेंसिल से आउटलाइन बनाएं, फिर लिप ग्लॉस लगाएं।
3. अगर मेकअप नहीं करना चाहतीं तो अपनी आंखों को फोकस करने के लिए वॉटरप्रूफ काजल या आइपेंसिल लगाएं।
 

हेल्दी टिप
सोयाबीन चाहे साबुत या किसी अन्य रूप में खाया जाए, यह त्वचा के लिए बहुत पोषक है। त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार यह ऐसे रसायनों से भरपूर है जो एस्ट्रोजन का काम करते हैं। इसका उपयोग करने से त्वचा चिकनी और मुलायम बनी रहती है उसमें चमक भी आ जाती है। इसमें विटमिन ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो नए कोशों का विकास करता है। साथ ही त्वचा को नम बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए स्वस्थ त्वचा के लिए हफ्ते में तीन बार आधा-आधा कप सोया जरूर खाएं।
 

अगस्त: आजाद हूं मैं
अपना बाहरी व्यक्तित्व और सौंदर्य निखारने के बाद अब आपको अपने अंतर्मन में झांकना और खुद से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि एक स्वतंत्र राष्ट्र की नागरिक होने के नाते आप कितनी आजाद हैं? क्या आप सामाजिक बुराइयों, अंधविश्वासों और मानसिक गुलामी के बंधनों से स्वयं को पूरी तरह मुक्त कर पाई हैं? भारतीय स्त्रियों के लिए अपनी स्थिति के मूल्यांकन और स्वयं को सामाजिक रूढियों के बंधनों से मुक्त करने के लिए यह बिलकुल सही समय है। क्योंकि इस महीने में हम देश की आजादी की सालगिरह मनाते हैं।
 

लक्ष्य : अगस्त
इस बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आप अपने बच्चों में अच्छे संस्कार और देशभक्ति की भावना विकसित करने का संकल्प लें। उन्हें अपनी संस्कृति का सम्मान करना सिखाएं। बच्चों को देश के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों पर घुमाने ले जाएं और उन्हें इन जगहों से जुडी घटनाओं एवं तथ्यों के बारे में रोचक ढंग से बताएं। अपने बच्चों को देश की आजादी के लिए जीवन का बलिदान देने वाले शहीदों से संबंधित अच्छी किताबें पढने या डीवीडी देखने के लिए प्रेरित करें।
हर अच्छे काम की शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी चाहिए, क्योंकि दूसरों को उपदेश देना बहुत आसान होता है, लेकिन अपनी जिंदगी में एक मामूली सा बदलाव लाने के लिए भी दृढ इच्छाशक्ति और कडी मेहनत की जरूरत होती है। इसलिए अगस्त माह में स्वतंत्रता दिवस को मद्देनजर रखते हुए दूसरों को सुधारने से पहले, हमें इसकी शुरुआत अपने परिवार से करनी चाहिए। आइए, सखी के साथ मिलकर हम सही मायने में कुरीतियों से मुक्त समाज बनाने की कोशिश करें:
1. आज से ही यह संकल्प लें कि मैं व्यावहारिक जीवन में दहेज प्रथा का विरोध करूंगी। अपने परिवार के किसी भी विवाह में दहेज के लेन-देन और प्रदर्शन के लिए अनावश्यक खर्च पर रोक लगाऊंगी।
2. अपने किसी भी काम को जल्दी पूरा करवाने के लिए रिश्वत कभी नहीं दूंगी और अपने कार्यस्थल पर भी पूरी निष्ठा व ईमानदारी से काम करूंगी।
3. जाति या धर्म के नाम पर अपने आसपास के लोगों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं बरतूंगी और अपनी बातों से किसी भी दूसरी जाति या धर्म के लोगों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाऊंगी।
4. ईश्वर के प्रति सच्ची आस्था रखते हुए अपने मन से उन अंधविश्वासों को निकाल फेंकूंगी, जो हमारे व्यक्तित्व के विकास में बाधक हैं।
5. अपने आसपास के लोगों के साथ किसी भी तरह की नाइंसाफी देखकर चुप नहीं रहूंगी, बल्कि लोगों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सिखाऊंगी।
6. अपने परिवार और पास-पडोस में रहने वाले बुजुर्गो का खयाल रखूंगी और जरूरत पडने पर हमेशा उनकी सहायता के लिए तत्पर रहूंगी।
7. अपने परिवार में बेटी को भी बेटे के समान वो सारी सुविधाएं दूंगी, जो उसके व्यक्तित्व और करियर के विकास की दृष्टि से आवश्यक हैं। उसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करूंगी ताकि वह अपने जीवन से जुडे सभी महत्वपूर्ण निर्णय खुद लेने में सक्षम हो।
8. कन्या भ्रूण हत्या का हमेशा विरोध करूंगी और कोशिश करूंगी कि हमारे परिचितों या रिश्तेदारों में से कोई ऐसा कुकृत्य न करे।
9. देश के जिम्मेदार नागरिक की तरह अपने मतदान के अधिकार का इस्तेमाल जरूर करूंगी।
10. अपने घर के आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा और हरा-भरा बनाने की कोशिश करूंगी। इस बारिश के मौसम में सडक के किनारे या पार्क में कम से कम दो पौधे जरूर लगाऊंगी और उनकी देखभाल भी करूंगी।
11. रोजमर्रा के जीवन में ऊर्जा के साधनों पानी, बिजली और पेट्रोल का अपव्यय रोकने की पूरी कोशिश करूंगी और अपने बच्चों को भी इसके लिए सचेत करूंगी।
12. अपने घर में कभी भी बाल मजदूर नहीं रखूंगी और अगर आसपास कोई ऐसा करे तो उसे रोकने की कोशिश करूंगी।
13. किसी जरूरतमंद परिवार के एक बच्चे की शिक्षा और भरण-पोषण की जिम्मेदारी खुद उठाऊंगी।
14. क्रोध और ईष्र्या-द्वेष जैसी नकारात्मक भावनाओं को नियंत्रित रखूंगी।
15. अपने पास-पडोस की स्त्रियों के साथ मिलकर जरूरतमंदों को आर्थिक और कानूनी सहायता प्रदान करूंगी।
16. अंत में, अपनी आजादी का उपयोग हमेशा सकारात्मक और रचनात्मक कार्यो के लिए करूंगी।
 

कितना  सक्षम है भारतीय पुरुष / स्त्री
आज जीवन के हर क्षेत्र में भारतीय पुरुष / स्त्री खुद को सक्षम साबित कर रही है। यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों में हस्तकला जैसे कार्यो के माध्यम से देश की गरीबी मिटाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि उनके इस प्रयास को तरजीह नहीं दी जाती।

 
हेल्दी टिप
अगस्त के महीने में बारिश की रिमझिम फुहारों के साथ चाय की चुस्कियों का मजा ही कुछ और होता है। अगर आप अपनी सेहत बनाना चाहती हैं और चाय पीने की शौकीन हैं तो हर्बल टी पीने की आदत डालें। इसमें कई ऐसे एंटी ऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की टूटी-फूटी कोशिकाओं की मरम्मत में सहायक होते हैं। इसमें मौजूद टैनिन नामक तत्व शरीर को स्फूर्ति प्रदान करने के साथ एसिडिटी को भी नियंत्रित करता है। इसलिए अगर चाय पीनी हो तो हर्बल टी पीने की आदत डालें और हमेशा चुस्त-दुरुस्त बनी रहें।
 

सितंबर: सेहतमंद जिंदगी के लिए फेमिली हेल्थ चेकअप
पिछले महीने आपने अपने परिवार को सामाजिक बुराइयों से मुक्त करते हुए एक आदर्श परिवार बनाने का संकल्प किया था और अब जरूरत है अपने परिवार को सेहतमंद बनाने की, क्योंकि तन स्वस्थ तो मन स्वस्थ। यहां फोर्टिस हॉस्पिटल के फिजीशियन अनिल गर्ग बता रहे हैं कि आप और आपका परिवार कैसे स्वस्थ रहे।
 

लक्ष्य: सितंबर
संकल्प लें कि जब मैं बाहर खाने पर जाऊंगी तो बटर पनीर या क्रीम पास्ता के बजाय थाई फूड ट्राई करूंगी। क्योंकि इनमें तमाम सारे ह‌र्ब्स और मसाले इस्तेमाल किए जाते हैं जो लो फैट होते हैं।
परिवार और करियर के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखने के लिए आपको रोजाना कापी दौडभाग और मेहनत करनी पडती है। इसके चलते आप अकसर अपनी और अपने परिवार की सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। क्या आप आजकल अपनी सेहत का खयाल ठीक से रख रही हैं? अपने परिवार की सेहत के प्रति संजीदा हैं? अगर नहीं तो कदम बढाएं सेहतमंद जिंदगी के लिए।
 

बुजुर्र्गो के लिए
अगर आप कम से कम 80 साल तक जीना चाहते हैं तो 80 अंक को अपने दिमाग में रखें। आपके फास्टिंग ब्लड शुगर और डायास्टॉलिक ब्लड प्रेशर की रीडिंग 80 या उससे कम होना चाहिए। साथ ही आपके कमर की नाप 80 सेमी. (36) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
चेकअप : ब्लड शुगर (फास्टिंग, पीपी), थॉयरायड, ब्लड प्रेशर और बोन डेंसिटी टेस्ट, यूरिन कल्चर, कार्डिक चेकअप्स और कोलेस्ट्रॉल टेस्ट।
 

स्त्रियों के लिए
डाइटीशियन ईशी खोसला के मुताबिक अपनी डाइट में प्रोटीन, कैल्शियम, विटमिन मिनरल्स शामिल करें। रोजाना दो ग्लास दूध, एक ग्लास ताजे फलों का रस और 4-5 भीगे हुए बादाम खाएं। एक बोल उबली हुई हरी सब्जियां, सैलेड और एक कटोरी दाल रोज लें। ब्रेकफस्ट कभी मिस न करें। रात भर (10-12 घंटे खाली पेट) सोने के बाद शरीर और मस्तिष्क को दोबारा खाने की जरूरत होती है। अगर आप ब्रेकफस्ट नहीं कर पाती हैं तो थोडे नट्स और एक केला जरूर खा लें। न्यूट्रिशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक 90 प्रतिशत टीनएज ग‌र्ल्स और स्त्रियां एनीमिक होते हैं। इसलिए अपनी डाइट में आयरनयुक्त चीजें जैसे पालक किशमिश और गुड शामिल करें।
चेकअप : कंप्लीट हीमोग्राम, डायबिटीज, पेल्विक अल्ट्रासाउंड, ब्रेस्ट एग्जामिनेशन, पेपस्मीयर एंड मैमोग्राफी और थॉयरायड टेस्ट, ब्लड शुगर (फास्टिंग, पीपी)।
 

पुरुष के लिए
लंबे समय तक सीट पर बैठ कर काम करने, समय पर खाना न खाने, फैटी और जंक फूड के कारण पुरुषों का वजन अचानक बढ जाता है। जब टमी बाहर नजर आने लगता है तो जुट जाते हैं हर तरह की एक्सरसाइज में। यह सेहत के लिहाज से नुकसानदेह है। 40 की उम्र के बाद किसी भी एक्सरसाइज को धीरे-धीरे करें। जिम ट्रेनर के निर्देशानुसार 20 मिनट ब्रिस्क वॉक व 40 मिनट बिल्ड-अप करें। कोलेस्ट्रॉल न बढे इसलिए जंक फूड से बचें।
चेकअप : ब्लड प्रेशर, वेट मेजरमेंट, कोलेस्ट्रॉल, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, एचआईवी टेस्ट और डायबिटीज टेस्ट।
 

बच्चों के लिए
इम्यून सिस्टम मजबूत बनाने, मानसिक विकास और बढत के लिए पौष्टिक डाइट लें। फ्रूट, वेजटेबल्स, डेयरी प्रोडक्ट्स और 6 मील बहुत जरूरी हैं।
चेकअप : हीमोग्राम, आरबीसी, टीसी एंड डीसी, ईएसआर, ब्लड ग्रुप, यूरिन एनालिसिस, मैनटॉक्स टेस्ट, चेस्ट एक्सरे, ईएनटी और डेंटल चेकअप, ग्रोथ टेस्ट।
 

हेल्दी टिप
दही में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। साथ ही लैक्टो बैसिलस नामक बैक्टीरिया पाया जाता है, जो पेट में इन्फेक्शन फैलाने वाले विषाणुओं को नष्ट करके पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। यह हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नियंत्रित करने में भी मदद करता है। यह हर उम्र के लोगों के लिए लाभदायक है इसलिए अपने रोजाना के भोजन में ताजा दही जरूर शामिल करें।
 

अक्टूबर: सुंदर और व्यवस्थित हो हमारा घर
साफ और सुव्यवस्थित घर में ही स्वस्थ तन-मन का विकास होता है, वास्तुशास्त्र में भी इस तथ्य को स्वीकारा गया है। अपने घर को वास्तु फ्रेंड्ली कैसे बनाए, बता रहे हैं वास्तु विशेषज्ञ डॉ. आनंद भारद्वाज।
 

लक्ष्य : अक्टूबर
आइए, हम इस महीने अपने घर के आसपास के वातावरण को भी साफ-सुंदर और प्रदूषण रहित बनाने का संकल्प लें। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पॉलिथीन बैग की वजह से हमारे पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। इसलिए खुद से यह वायदा करें कि हम अपने घर में पॉलिथीन बैग के बजाय कपडे से बने थैलों या कागज के लिफाफों का इस्तेमाल करेंगे।
 

क्लटर फ्री होम
अक्टूबर के महीने तक बरसात खत्म हो चुकी होती है और सर्दी हौले-हौले दस्तक देने लगती है। यह ऐसा समय है, जब नए सिरे से पूरे घर को व्यवस्थित करके उसे कंप्लीट क्लटर फ्री बनाना बहुत जरूरी हो जाता है। क्योंकि बरसात की वजह से घर में रखी पुरानी और बेकार चीजों में ऐसे बैक्टीरिया और फफूंद आदि भर जाते हैं, जो सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह होते हैं। इसके लिए कुछ बातों का खास तौर पर ध्यान रखना चाहिए :
1. अपने पूरे घर पर एक नजर डालें कि कौन सी ऐसी चीजें हैं, जिनका इस्तेमाल कुछ वर्षो या महीनों से नहीं हुआ। ऐसी चीजें भले ही अपनी नई पैकिंग में रखी हों, फिर भी वास्तु की दृष्टि से इन्हें कबाड ही माना जाता है। ऐसी चीजें निकालकर जरूरतमंदों को बांट दें।
2. अपना बॉक्स बेड चेक करें और इस बात का ध्यान रखें कि उसमें बेवजह पुरानी चीजें जमा न होने पाएं। वास्तु के अनुसार अगर बॉक्स बेड में बेकार और पुरानी चीजों का संग्रह हो तो इससे नींद में बाधा पैदा होती है।
3. किचन में कई बार ऐसी चीजें जमा हो जाती हैं, जिनकी हमें वाकई जरूरत नहीं होती। जैसे-पुराने बर्तन, डिब्बे, फ्रिज की बोतलें आदि। ऐसी चीजों को हटाते रहना जरूरी है। स्टोर और गराज में भी फालतू सामानों का संग्रह न करें।
 

वास्तु फ्रेंड्ली घर
इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से परिवार में खुशहाली आती है :
1. घर का मुख्यद्वार पूर्व दिशा में होना शुभ माना जाता है। इस दिशा में स्थित सभी खिडकियों और दरवाजों को सुबह के वक्त खोलकर रखें, क्योंकि इनसे घर में ताजी हवा और सूरज की रोशनी के साथ सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रवेश होता है।
2. दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित खिडकियों और दरवाजों को अकसर बंद रखें या उन पर भारी परदे डालकर रखें।
3. पूजा का स्थल पूर्वोत्तर दिशा में होना चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो तो दक्षिण-पश्चिम को छोड कर किसी भी दिशा में स्थित कमरे के पूर्वोत्तर कोने में भगवान की मूर्ति इस तरह स्थापित करें कि पूजा करते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर रहे।
4. वास्तु की दृष्टि से दक्षिण-पूर्व दिशा किचन के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा इनवर्टर, टीवी, मेन स्विच बोर्ड, इलेक्ट्रिक मीटर, जेनरेटर आदि के लिए भी यह दिशा उपयुक्त होती है।
 

घर में लाएं सकारात्मक ऊर्जा
5. घर में सुबह और शाम के वक्त धीमे स्वर में कोई मधुर संगीत बजने दें ताकि परिवार के सदस्यों को पॉजिटिव साउंड एनर्जी का लाभ मिल सके। इससे घर के संपूर्ण वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा।
6. घर की लॉबी में विंडचाइम लगाना भी फायदेमंद साबित होता है। इससे निकलने वाली मधुर स्वर-लहरियां पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।
7. घर में हमेशा सकारात्मक भावना दर्शाने वाली सुंदर पेंटिंग्स या शो पीसेज लगाएं। डूबता सूरज, तूफान में घिरा जहाज, रोता हुआ बच्चा, हिंसक पशु और युद्ध के दृश्य वाली पेंटिंग्स, डरावनी मुखाकृति वाले शो पीसेज या टूटी हुई मूर्तियां घर में नहीं सजानी चाहिए।
8. घर की सफाई का पूरा ध्यान रखें और पोंछा लगाते समय पानी में चुटकी भर सी-सॉल्ट मिलाएं। इससे वातावरण की नकारात्मकता दूर होती है।
9. हर महीने कैलेंडर का पृष्ठ पलटती रहें। इस बात का ध्यान रखें कि घर की सारी दीवार घडियां एवं इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स सही ढंग से काम करते रहें।
10. अगर किसी दरवाजे से कर्कश ध्वनि निकलती है तो उसे तुरंत ठीक करा लें।
11. घर के उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में पानी का छोटा सा फाउंटेन या एक्वेरियम रखने से धन के देवता कुबेर प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
 

हेल्दी टिप
विटमिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्वों से भरपूर आंवले को अपने आहार में जरूर शामिल करें। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।
 

नवंबर: वॉर्डरोब वंडर
जिस तरह सीजन बदलता है उसी तरह मूड भी बदलता है। मूड बदलने का सबसे अच्छा तरीका है कि अपने वॉर्डरोब में फेरबदल करें। खुद को नई पहचान देने के लिए नवंबर में वॉर्डरोब मेकओवर का संकल्प लें। इस गुलाबी ठंड का स्वागत करें अपने वॉर्डरोब में सिप एक नया पीस शामिल करके.और क्रिएट करें यूनीक स्टाइल स्टेटमेंट।
 

लक्ष्य : नवंबर
मिक्स एंड मैच का फंडा बेफिक्र होकर अपनाएं। अपना खद का स्टाइल स्टेटमेंट क्रिएट करें।
विंटर्स है तो क्या हुआ, इस सीजन में भी आप हॉट पैंट्स और शॉर्ट स्कर्ट पहन सकती हैं। फैशन डिजाइनर्स ने इस प्रॉबलम का सिंपल सलूशन निकाला है -लेगिग्स। केवल मल्टीकलर्ड एंड प्रिंटेड लेगिग्स अपने वॉर्डरोब में शामिल करके सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बन सकती हैं।
वेस्टर्न वेयर हो या ट्रडिशनल, बोलेरो जैकेट इन सर्दियों में हॉटेस्ट ट्रेंड के रूप में उभरा है। इन्हें किसी भी कैजुअल ट्यूनिक व सिंपल सूट के साथ टीम करके ग्लैमरस लुक पा सकती हैं। साथ ही डेनिम व ट्राउजर के साथ भी को-ऑर्डिनेट किया जा सकता है।
हमेशा की ही तरह इस विंटर्स भी लॉन्ग बूट्स काफी पॉपुलर रहेंगे। जिनके लेग्ज शेप्ड नहीं होते और जिन्हें बेहद ठंड लगती है, उनके लिए बेस्ट ऑप्शन हैं बूट्स।
विंटर्स में हमारे वॉर्डरोब का अहम हिस्सा बन जाते हैं वुलन कैप्स। तो क्यों न इन्हें अपने क्लोजेट में शामिल करके अपनाएं वॉर्म लुक। डिजाइनर्स ने हैंड निटेड वुलन कैप्स के ब्राइट कलर पैलेट पर बोल्ड पैटर्न का बखूबी प्रयोग किया है। जिन्हें पहनकर इस डल सीजन में ब्राइटनेस ला सकती हैं आप।
किसी भी सिंपल व कैजुअल आउटफिट को अट्रैक्टिव बना देती हैं नेक पीसेज। आजकल मल्टी स्ट्रैंड मटैलिक नेक पीसेज काफी चलन में हैं। केवल एक हेवी पीस ओवरऑल पर्सनैलटी को डिफाइन करने में मदद करेगी। विंटर्स के लिए स्कार्फ स्टाइल नेक पीसेज बेस्ट हैं। इनकी खासियत है कि इन्हें इंडियन या वेस्टर्न, किसी भी आउटफिट के साथ को-ऑर्डिनेट किया जा सकता है।
फैशन डिजाइनर्स मानते हैं कि इस सीजन लॉन्ग जैकेट या कोट फैशन कॉन्शियस लोगों को सबसे ज्यादा पसंद आएंगी। फॉर्मल ओकेजंस पर ट्राउजर के साथ टीम करें। साथ ही बिना किसी लोअर्स के इसे पार्टी में पहनकर ट्रेंडी लग सकती हैं।
समर वॉर्डरोब में फेरबदल करके शॉर्ट स्कर्ट को ट्रेंडी लुक देने के लिए इसे जैकेट या सिक्विंड शर्ट के साथ कंबाइन करें। ऐसा नहीं है कि विंटर्स में शॉर्ट स्कर्ट नहीं पहनी जा सकती। अगर आपने फुल स्लीव्स जैकेट या वूलन टॉप पहना है तो कोई जरूरी नहीं है कि आप स्कर्ट को लेगिंग्स या स्लेक्स के साथ टीम करें।
पटियाला सलवार, हैरेम पैंट्स, लूज ट्राउजर हम सभी के वॉर्डरोब में होते हैं। क्योंकि यह कंफर्टेबल आउटफिट्स हैं, इन्हें फिटेड टॉप या स्वेटर्स के साथ को-ऑर्डिनेट कर सकती हैं। साथ में एक्सेसरीज के तौर पर बेल्ट का प्रयोग भी कर सकती हैं।
 

हेल्दी टिप
अगर आप सुंदर दिखना चाहती हैं तो गाजर को हर रूप में अपने डाइट में शामिल करें। इसमें विटमिन ए की मात्रा भरपूर होती है। त्वचा को भी यह हमेशा जवां बनाए रखने का काम करता है।
 

दिसंबर: तय करें कहां खडे हैं हम
दिसंबर के महीने में जहां एक ओर वर्ष बीतने का एहसास तेजी से होता है, वहीं नए साल के स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। पिछले पन्नों में सखी के साथ आपने कुछ व्यावहारिक संकल्प लिए। साल का बारहवां व अंतिम महीना है। वक्त है यह सोचने का कि संकल्पों को किस हद तक पूरा कर सके! जीवन के लिए जो मूल्य तय किए-उन पर कितने खरे उतरे! जो लक्ष्य निर्धारित किए-उन्हें किस हद तक पा सके! इस प्रश्नावली में हिस्सा लेकर आत्ममूल्यांकन करें। जानें कि जिंदगी के किस पहलू पर आप संतुलित हैं और कहां सुधार की गुंजाइश है।
उम्रे-दराज मांग कर लाए थे चार दिन
दो आरजू में कट गए दो इंतजार में।
अंतिम मगल बादशाह बहादुर शाह जफर की ये पंक्तियां समय की कीमत पर बहुत-कुछ कह जाती हैं। जिंदगी दो दिन की है और कल कभी नहीं आता। छोटे से इस जीवन में करने को बहुत-कुछ है। बात नए साल के आगाज से शुरू की थी और अब दिसंबर तक आ पहुंचे हैं। सखी के साथ मिलकर आपने भी कुछ संकल्प लिए। अब वक्त है आत्म-मूल्यांकन का। संकल्प कहां तक पूरे हुए? जो लक्ष्य निर्धारित किए थे, उन्हें किस सीमा तक पा सके? जीवन के शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्तर पर कितना संतुलन बिठा सके? मनसा, वाचा, कर्मणा यानी मन, वचन या कर्म से अपने प्रति कितने ईमानदार रहे? यहां दी जा रही प्रश्नावली के जवाब ईमानदारी से दें, खुद जान जाएंगे कि जीवन के किन स्तरों पर आप संतुलन बिठा सके हैं और किस स्तर पर बदलाव की जरूरत है।
 

बॉडी (शारीरिक)
मैंने नियमित वॉक करने के अपने संकल्प को पूरा किया।
जरूरत पडने पर मैंने अपने और परिवार का मेडिकल चेकअप कराया।
हेल्दी फ्रूट्स व वेजटेबल्स को नियमित डाइट में शामिल किया।
मैंने अपनी दिनचर्या व्यवस्थित की, साथ ही सोने-जागने का अपना समय भी निर्धारित किया।
शरीर को निरंतर कष्ट देने के बजाय जरूरत पडने पर मैंने आराम और भरपूर नींद लेने का खयाल रखा।
मैंने वेट मैनेजमेंट के अपने लक्ष्य का पूरा ध्यान रखा। महीने में एक बार बॉडी मसाज कराने, स्पा लेने का अपना टारगेट मैंने पूरा किया।
चाय, कैफीन, कॉफी के बजाय मैंने दिन भर तीन-चार लीटर पानी पीने की आदत डाली।
मैंने पर्सनल ग्रूमिंग पर ध्यान दिया और अपनी लाइफस्टाइल में सुधार की पूरी कोशिश की।
वार्डरोब में कुछ बदलावों के अलावा मैंने अपने पूरे घर व ऑफिस की साज-सज्जा में भी बदलाव किए।
 

माइंड (मानसिक)
मैंने साल में दो बार लंबा अवकाश लिया और परिवार के साथ घूमने गई/गया।
मैंने नई चीजों को सीखना जारी रखा और अपनी रुचि बरकरार रखी।
कार्यस्थल में आने वाली कठिनाइयों को मैंने चुनौती मानकर स्वीकार किया।
दिन भर में कुछ खास पल मैंने सिर्फ अपने लिए निकाले, जिनमें अपने छूट चुके शौक पूरे किए। मित्रों-रिश्तेदारों से मिलने-जुलने के अलावा मैंने सामाजिक रिश्ते भी सुधारे।
परिवार और बच्चों के साथ भरपूर समय गुजारा और उन्हें शिकायत का मौका नहीं दिया।
दुख-तकलीफ के समय मैंने संतुलन बनाए रखा और इसे जीवन का हिस्सा माना।
आर्थिक पहलू पर समझदारी भरे निर्णय लिए, बचत पर ध्यान दिया और घरेलू बजट भी बनाया।
मैंने अपनी स्किल बढाने के लिए कुछ प्रोफेशनल कोर्स किए।
ऑफिस में परफेक्शन के साथ अपना काम समय पर पूरा किया।
 

सोल (आत्मिक)
मैंने जीवन में ध्यान, प्रार्थना और योग की महत्ता समझी और इसे दिनचर्या में शामिल किया।
बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में समझाया और घर में पॉलीथिन बैग को प्रतिबंधित किया ।
मैंने कुछ अच्छे काम नि:स्वार्थ भाव से किए, जिनसे मुझे आत्मिक संतोष मिला।
रोज सोते समय मैंने ईश्वर का धन्यवाद किया कि उसने मुझे दिन को अच्छी तरह बिताने में मदद की।
परिवार, संबंधियों और मित्रों की कीमत मैंने समझी, सारी गलतफहमियों को दूर कि.या।
कुछ जरूरतमंदों की मदद की। खुद में एक नई ऊर्जा व उत्साह का अनुभव किया।
मैंने परनिंदा के बजाय आत्मविश्लेषण की नई राह पर चलना सीखा।
जब कभी हताशा-निराशा या दुख ने मुझे घेरा, मैंने खुद से अधिक दुखी लोगों की ओर देखा।
किसी भी दुविधापूर्ण स्थिति में मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी।
हर सुबह मैंने दिन शुरू करने से पहले खुद से पूछा कि मैं कौन हूं और मेरा उद्देश्य क्या है?
 

अंकों का गणित
हां : 10 अंक
कभी-कभी : 7 अंक
नहीं : 3 अंक
अगर आपका स्कोर 225 से 300 के बीच आता है तो आप अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित व गंभीर हैं। आप जीवन में संतुलन का महत्व समझते हैं। कहा जा सकता है कि आप निजी-प्रोफेशनल जिंदगी में परफेक्ट हैं। यदि आपके कुल अंक 150 से 225 के बीच हैं तो जीवन को व्यवस्थित करने के लिए आप प्रयासरत हैं। आप सही राह पर हैं, इसलिए कभी न कभी लक्ष्य भी प्राप्त कर ही लेंगे। अगर आपके अंक 90 से 150 के बीच हैं तो कहीं न कहीं आपके जीवन में संतुलन की कमी है। परेशान न हों, फिर से जीवन का अर्थ समझें और अपने लिए कुछ लक्ष्य अवश्य बनाएं। जो खो गया है, उसे लौटाया नहीं जा सकता, लेकिन जो सामने है-उसे पाया जा सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि आप अपनी निगाहों में कैसे व्यक्ति हैं और आपकी जिंदगी का असल मकसद क्या है! ( दैनिक जागरण )

Friday, December 24, 2010

सारगर्भित उत्तर से मिलेगी सफलता


सारगर्भित उत्तर से मिलेगी सफलता समाज में प्रोफेसर और लेक्चरर को काफी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद पद के साथ-साथ सैलरी भी काफी हो गई है। यही कारण है कि यूजीसी परीक्षा में काफी संख्या में स्टूडेंट्स बैठने लगे हैं। यूजीसी जेआरएफ और नेट की परीक्षा 26 दिसंबर को होनी है। इसके लिए आप तैयारी को अंतिम रूप देने में जुट गए होंगे। इसमें सफलता उन्हीं स्टूडेंट्स के हाथ लगेगी, जो काफी कठिन मेहनत करने के साथ ही व्यावहारिक सोच भी रखते हैं। यदि आप भी इस परीक्षा के लिए आवेदन कर चुके हैं और इसकी तैयारी में जुटे हैं, तो हम आपके लिए कुछ खास स्ट्रेटेजी बता रहे हैं, जिससे आप इस बचे हुए समय में बेहतर तैयारी करने में सफल हो सकें। सबसे पहले अपना टारगेट फिक्स करें। अब समय काफी कम हैं। इसलिए ऐसा टारगेट बनाना जरूरी हो जाता है। क्वालिफाइंग पेपर के लिए पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन तथा समसामयिक मुद्दों व घटनाओं से संबंधित तथ्यों का संकलन क्वालीफाइंग की शर्त को आसान बना सकता है।
 
समय का बंटवारा जरूरी
इसके लिए चार सौ अंकों की लिखित परीक्षा दो चरणों में होगी। इसमें तीन प्रश्नपत्र होंगे। पहला प्रश्नपत्र सामान्य स्तर का होगा। इस पेपर का मुख्य उद्देश्य परीक्षार्थी की शिक्षण एवं शोध क्षमता की जानकारी करना है। इसके साथ ही इसके अंतर्गत रीजनिंग एबिलिटी, कॉम्प्रिहेंसन, डाइवरजेंट थिंकिंग ऐंड जनरल अवेयरनेस से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। यह पेपर सभी अभ्यर्थियों के लिए अनिवार्य होगा तथा इसके लिए सौ अंक तथा सवा घंटा निर्धारित है। आपके लिए जरूरी है कि तैयारी के समय ही उसके महत्व के अनुसार पढाई करें। इसके लिए यदि आप अभी से सिर्फ एक घंटा का अभ्यास करते हैं, तो इस विषय की तैयारी के लिए काफी है। आपके लिए जरूरी है कि आप अभी इस पर अमल करना शुरू कर दें। इसी तरह द्वितीय प्रश्नपत्र में अभ्यर्थी द्वारा चुने गए विषय से संबंधित 50 वस्तुनिष्ठ प्रश्न होते हैं। इसके लिए भी सौ अंक तथा समय सवा घंटा है। आप किसी संबंधित गाइड से विषय से संबंधित प्रश्नों की तैयारी के लिए भी समय निर्धारित कर लें।
 
गहन अध्ययन जरूरी
तीसरा और दूसरा प्रश्नपत्र काफी अहम होता है और इसी विषय में परफॉरमेंस के आधार पर आपका चयन काफी हद तक निर्धारित होता है। जैसा कि आप जानते हैं कि तीसरा प्रश्नपत्र अभ्यर्थी द्वारा चुने गए विषय से संबंधित होता है, जिसके प्रश्न डिस्क्रिप्टिव टाइप के होंगे। इसके लिए कुल दो सौ अंक तथा ढाई घंटे रखे गए हैं। मेधा सूची निर्धारित करने वाले पेपर-दो की तैयारी के लिए संपूर्ण सिलेबस का अध्ययन आवश्यक है। साथ ही, इसकी तैयारी के सिलेबस के अनुसार वन लाइनर तथ्यात्मक नोट्स बनाना सफलता के काफी करीब पहुंचा सकता है। किसी भी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए आपको सौ फीसदी प्रदर्शन करना ही होगा। यदि आप भी इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, तो अभी से बनाई गई योजना को पूरा करने के लिए जी जान से जुट जाएं। आप इस बीच पांच वर्षो के प्रश्नों को देखकर यह अंदाजा लगाकर वस्तुनिष्ठ और डिसक्रिप्टिव उत्तर लिखने का अभ्यास कर सकते हैं। इसके साथ ही इस विषय में आपकी भाषा शैली और लिखने का स्टाइल देखा जाता है। आपके लिए बेहतर होगा कि आप आदर्श उत्तर लिखने का अभ्यास करें। यदि आपके आसपास सीनियर्स हैं, तो इसमें आप उनकी भी मदद ले सकते हैं। इसके अलावा आप संबंधित विषय से संभावित प्रश्नों की एक सूची भी बना सकते हैं। इस तरह की सूची बनाने में पिछले दस वर्षो के प्रश्नों का अध्ययन काफी लाभ पहुंचा सकता है।
 
कैसे लिखें बेहतर उत्तर
परीक्षा के लिए बहुत कम समय बचा है। इस कारण आप यह सुनिश्चित कर लें कि आप किस सेक्शन से दीर्घ उत्तर लिखेंगे। इस परीक्षा में दो प्रश्न लॉन्ग होंगे, जिसके लिए 40 अंक निर्धारित हैं। इस कारण इसकी तैयारी के लिए पहले से रणनीति बनाना जरूरी है। आप क्रिटिकल और एनालिटिकल उत्तर लिखेंगे, तो अच्छे मा‌र्क्स प्राप्त कर सकते हैं। यह तभी संभव हो पाएगा, जब आप इस तरह के उत्तर लिखने का अभ्यास करेंगे। इसके अलावा इस परीक्षा में 50 शब्दों के उत्तरों की संख्या अधिक होती है। इस कारण यह स्कोरिंग माना जाता है। आप निर्धारित समय-सीमा के अंदर प्रश्नों को लिखने का खूब अभ्यास कर सकते हैं। अच्छे अंक तभी प्राप्त कर सकते हैं, जब आपका उत्तर साफ और सही हो। विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी एग्जामनर सभी प्रश्नों का उत्तर नहीं पढता है, लेकिन सभी प्रश्नों के उत्तर का इंट्रोडक्शन और अंत में मूल्यांकन अवश्य देखता है। यदि आप इंट्रोडक्शन में ही उत्तर से संबंधित महत्वपूर्ण टॉपिक्स लिखते हैं और अंत में उसका सारांश कम शब्दों में बेहतर तरीके से लिखने में सफल होते हैं, तो आप परीक्षा में बेहतर कर सकते हैं।
विजय झा ( दैनिक जागरण )

Saturday, December 11, 2010

चार्टर्ड अकाउंटेंट इंतजार में हैं नौकरियां

सेंट्रल बैंक में सुनहरा अवसर.


  सीए एक प्रतिष्ठा का जॉब है। इसमें वह सब कुछ है, जो आज का स्टूडेंट्स नौकरी के साथ चाहता है। यही कारण है कि कॉमर्स स्ट्रीम के स्टूडेंट्स इसे प्राथमिकता की सूची में शिखर पर रखते हैं। वेतन के मामले में यह एमबीए से किसी भी सूरत में पीछे नहीं है। अकाउंटिंग का मास्टर कहे जाने वाले इस प्रोफेशनल की पहुंच सभी क्षेत्रों में होती है, इसलिए हर कंपनी इन्हें अपने यहां जॉब पर रखना चाहती है और हर युवा इस कोर्स को करना चाहता है। युवाओं के रुझान का पता इसी से लगाया जा सकता है कि सन 2007 में जहां 2.7 लाख स्टूडेंट्स इसके एग्जाम में शामिल हुए थे, वहीं यह संख्या 2010 में 7.65 लाख हो गई। यदि आप भी सीए बनकर पैसे के साथ समाज में प्रतिष्ठा पाना चाहते हैं, तो यह प्रोफेशन सबसे उपयुक्त साबित हो सकता है।
 

क्यों है महत्वपूर्ण
अर्थव्यवस्था के विकास में इनका अहम रोल होता है। इसके महत्व का आकलन इसी से लगाया जा सकता है कि अब सीए की पहुंच आईटी सेक्टर के अलावा फाइनेंस, रिस्क ऐंड इंश्योरेंस सर्विस में भी हो गई है। इनकी बढती भूमिका को देखते हुए ही सीए को कंप्लीट बिजनेस सॉल्यूशन प्रोवाइडर कहा जाता है। किसी कंपनी या बिजनेस को कैसे चलाया जाना चाहिए, इसका प्रबंधन, कानूनी और व्यावसायिक पहलू, योजना और रणनीति, इन सब कामों के लिए सीए की जरूरत पड रही है।
 

सीए ही क्यों
सीआईआरसी के ट्रेजरार और सीए मनु अग्रवाल कहते हैं कि आप लो प्रोफाइल परिवार से हैं या किसी अमीर परिवार से, अगर मेहनत करने की क्षमता रखते हैं तो सीए के रूप में कामयाब हो सकते हैं। यह ऐसा क्षेत्र हैं, जो गरीब और अमीर, दोनों वर्ग के युवाओं को अपने यहां आने का मौका देता है। ग्रामीण हो चाहें शहरी, दोनों जगहों के छात्र यहां अपनी जगह बना सकते हैं। इसकी पढाई की फीस अन्य प्रोफेशनल कोर्स के मुकाबले बहुत कम रखी गई है, लेकिन सीए का करियर किसी भी प्रोफेशन से किसी भी मामले में कम नहीं है। इसके अलावा इस कोर्स की सबसे बडी खासियत यह है कि इसमें कोई बेरोजगार नहीं रहता है और इसे घर बैठकर भी किया जा सकता है। इसमें सैलरी भी काफी होती है। सीए के अगस्त-सितंबर 2010 के कैंपस प्लेसमेंट में तोलाराम कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड ने तीन स्टूडेंट्स को 21-21 लाख रुपये प्रतिवर्ष दिए थे।


 
चार्टर्ड अकाउंटेंट इंतजार में हैं नौकरियां 














क्या है सीए
सीए संसदीय अधिनियम द्वारा पारित कोर्स है। इसमें रेगुलर क्लास की अनिवार्यता नहीं है। देश में चार्टर्ड अकाउंटेंसी का कोर्स सन 1949 में शुरू किया गया था। यह एक प्रोफेशनल कोर्स है,जिसे चलाने के लिए द चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया का गठन किया गया, जिसका कार्य पाठ्यक्रम चलाने की जिम्मेदारी के साथ चार्टर्ड अकाउंटेंसी का एग्जाम कराना तथा प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस जारी करना है।
चार्टर्ड अकाउंटेंसी परीक्षा प्रोग्राम
किस तरह की परीक्षा
चार्टर्ड अकाउंटेंसी प्रोग्राम के तीन पार्ट हैं।
कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट (सीपीटी)
इंट्रीग्रेटेड प्रोफे शनल कम्पीटेंस कोर्स (आईपीसीसी)
सीए फाइनल।
 

सीपीटी
कॉमन प्रोफेशिएंसी टेस्ट में दो सेशन होते हैं, प्रत्येक सेशन 100 नम्बर का है और हर सेशन में दो सेक्शन होते है। प्रत्येक सेशन के लिए दो घंटे का समय निर्धारित है। प्रश्न ऑब्जेक्टिव ही पूछे जाते हैं तथा मार्किग निगेटिव होती है। सेशन एक के सेक्शन ए में फंडामेंटल ऑफ अकाउंट 60 नंबर का एवं मार्के टाइल लॉ से 40 नम्बर के प्रश्न होते हैं। सेशन द्वितीय के सेक्शन सी एवं डी से जनरल इकोनॉमिक्स 50 नम्बर तथा क्वांटेटिव एप्टीट्यूड से 50 नम्बर के प्रश्न पूछे जाते हैं। पहले सिर्फ बारहवीं पास स्टूडेंट्स को ही इस तरह की परीक्षा देने की अनिवार्यता थी, लेकिन अब सभी स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य है।
 

आईपीसीसी
आईपीसीसी के विषयों को दो समूहों में विभाजित किया गया है। आईपीसीसी परीक्षा के माध्यम से बिजनेस स्ट्रेटेजी, टैक्सेस इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी और ऑडिट के साथ बिजनेस कम्युनिकेशन ज्ञान को भी परखा जाता है। इसके अंतर्गत दो ग्रुप होते हैं। आप चाहें तो दोनों ग्रुप एक साथ दे सकते हैं या एक-एक ग्रुप अलग-अलग दे सकते हैं। आईपीसीसी का एक ग्रुप पास करने के बाद आप आर्टिकलशिप के लिए योग्य जाते हैं। आप चाहें, तो किसी सीए फर्म में आर्टिकलशिप ज्वाइन कर सकते हैं। कहने का आशय यह है कि तीन वर्ष की आर्टिकलशिप ट्रेनिंग करने के बाद ही आप फाइनल परीक्षा में बैठने के लिए योग्य हो सकते हैं।
 

सीए-फाइनल
फाइनल में स्टूडेंटृस को अकाउंटेंसी प्रोफेशन से संबंधित विषयों के एडवांस स्टेज की जानकारी दी जाती है। इसमें विद्यार्थियों को फाइनेंशियल रिर्पोटिंग,फाइनेंशियल मैनेजमेंट, एडवांस मैनेजमेंट इन अकाउंटिंग, ऑडिटिंग ऐंड प्रोफेशनल एथिक्स, इंफॉर्मेशन सिस्टम कंट्रोल ऐंड ऑडिट, प्रिंसपल ऑफ ई गवर्नेस, कॉरपोरेट ऐंड एलाइड लॉ, इंटरनेशनल टैक्सेसन ऐंड वैट आदि से संबंधित ज्ञान का परीक्षण किया जाता है। इसमें भी दो ग्रुप होते हैं और आप चाहें, तो दोनों ग्रुप को एक साथ दे सकते हैं। फाइनल एग्जामिनेशन में कैंडिडेट्स को दो ग्रुपों में आठ प्रश्नपत्र पास करने होते हैं। प्रत्येक प्रश्नपत्र सौ अंक का होता है।
 

अपडेटेड कोर्स है सीए
सीए अब किसी कंपनी के व्यवसाय के बडे से बडे ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा है। पहले उसकी भूमिका अकाउंट संभालने तक ही सीमित थी। आज इसके कोर्स को अपडेट करके कम्प्यूटर ट्रेनिंग, कम्युनिकेशन स्किल और पर्सनेलिटी डेवलपमेंट से भी जोड दिया गया है। इंस्टीट्यूट समय और आवश्यकता के अनुरूप कोर्स में समय-समय पर बदलाव करता रहता है, ताकि स्टूडेंट्स नई-नई जानकारी से अपडेट होते रहें। एक कामयाब सीए बनने के लिए पेशे की अच्छी समझ, कमिटमेंट, गंभीरता, ईमानदारी और खुद को अपडेट करते रहना जरूरी है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून को भी समझना चाहिए।
अमरजीत चोपडा
प्रेसीडेंट, आईसीएआई, दिल्ली
 

बढ रहा है डुएल डिग्री का महत्व
सीए का प्रोफेशन अपने आप में बेहतर है, लेकिन आजकल हर कंपनियां डुएल डिग्री को वरीयता दे रही है। यही कारण है कि मैंने सीए और एमबीए किया। यदि आपके पास सीए के साथ-साथ मैनेजमेंट या बीकॉम या एमकॉम की डिग्री है, तो आपके लिए बेहतर अवसर हो सकते हैं, क्योंकि इन दिनों कंपनियां ऐसे एम्प्लाई चाहती है, जो हर तरह के काम करने में सक्षम हों। सीए का कोर्स करने के बाद आप किसी भी कंपनी में बतौर फाइनेंस मैनेजर, फाइनेंशियल कंट्रोलर, फाइनेंशियल एडवाइजर या फाइनेंस डायरेक्टर की हैसियत से काम कर सकते हैं। अकाउंटेंसी, ऑडिटिंग, टैक्सेशन, इंवेस्टीगेशन तथा कंसलटेंसी, इंश्योरेंस, आईटी, पब्लिक फाइनेंस और रिस्क ऐंड इंश्योरेंस सर्विस के क्षेत्र में भी अवसरों की भरमार है। आप किसी भी स्ट्रीम से जुडे हुए हों, यदि रुचि और योग्यता है, तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है। वर्तमान में आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव एमटेक हैं और देश की अर्थव्यवस्था निर्धारित कर रहे हैं।
राकेश दत्ता
हेड फाइनेंस, सकाटा इंक्स इंडिया लि.
 

परीक्षा की तैयारी में अनुशासन आवश्यक
सीए परीक्षा की तैयारी के लिए जरूरी है कि आप चार से पांच वर्षो के प्रश्नपत्रों को निर्धारित समय-सीमा के अंदर हल करने की कोशिश करें। बेहतर होगा कि आप घर पर रहकर परीक्षा की तरह प्रश्नों को हल करने का अभ्यास करें। इससे आपका कॉन्फिडेंस बढेगा और समय रहते तैयारी भी बेहतर हो जाएगी। इंस्टीट्यूट द्वारा सजेस्टेड आंसर भी मिलते हैं, आप उसका गहराई से अध्ययन करें। फाइनेंस सर्विस और सिस्टम ऑडिट में सीए प्रोफेशनल की काफी मांग है।
के.के. अवस्थी, सीनियर जीएम-कॉरपॉरेट, जेपीएल
 

सिस्टेमेटिक स्टडी जरूरी
चार्टर्ड अकाउंटेंसी के फाइनल वर्ष की परीक्षा दे रही छात्रा चारु कहती हैं कि सीए इतना टफ नहीं, जितना लोगों में इस कोर्स के प्रति भय व्याप्त रहता है। यदि टाइम मैनेजमेंट का ध्यान रखते हुए सिस्टेमेटिक स्टडी की जाए तो तय समय में यह कोर्स पूरा किया जा सकता है। मैं इंटरमीडिएट के बाद इंरोल्ड हुई और 2006 में सीपीटी में ऑल इंडिया में मेरी 8वीं रैंक आई और 2008 में पीसीसी में मुझे 5वीं रैंक मिली। अब फाइनल की परीक्षा दे रही हूं। मेरी यह सफलता केवल सिस्टेमेटिक स्ट्डी का ही परिणाम है।
चारु अग्रवाल, सीए फाइनल स्टूडेंट्स
 
 ट्रेनिंग में स्टाइपेंड
तीन वर्ष की ट्रेनिंग के दौरान स्टूडेंट्स को स्टाइपेंड दिया जाता है। यह स्टाइपेंड उसी सीए को देना पडता है, जिसके मार्गदर्शन में स्टूडेंट्स प्रैक्टिस करते हैं। इंस्टीट्यूट नॉ‌र्म्स के मुताबिक स्टूडेंट्स को प्रथम वर्ष एक हजार रुपये, दूसरे वर्ष 1250 रुपये एवं तीसरे वर्ष 15 सौ रुपये दिए जाते हैं।
15 दिन का जीएमसीएस कोर्स
स्टूडेंट्स को तीन वर्ष का प्रशिक्षण करने के उपरांत 15 दिनों का जनरल मैनेजमेंट ऐंड कम्युनिकेशन स्किल्स (जीएमसीएस)कोर्स करना पडता है। यह सभी स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य है। इसे इंस्टीट्यूट ही कराता है। इस कोर्स के माध्यम से स्टूडेंट्स को मैनेजमेंट स्किल्स मजबूत करने की कोशिश की जाती है।
 
सीए के लिए योग्यता
चार्टर्ड अकाउंटेंसी कोर्स करने के लिए न्यूनतम योग्यता बारहवीं उत्तीर्ण होना है। यदि आप ने किसी भी स्ट्रीम से 10+2 किया है या फिर परीक्षाफल आने वाला है तो आप सीपीटी यानि कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट में बैठने की योग्यता रखते हैं। इसके पहले यह नियम था कि ग्रेजुएशन करने के बाद स्टूडेंट्स को सीपीटी नहीं देना पडता था। अब सीपीटी पास करने के बाद ही आईपीसी में बैठने की अनुमति मिलेगी।
 
एग्जाम का समय
आईसीएआई की स्थापना वर्ष 1949 से लेकर वर्तमान समय तक परीक्षा का आकार एवं नेटवर्क खूब बढा है। 1949 में आयोजित पहले एग्जाम में 450 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे, जिनकी संख्या बढकर अब एक लाख से कहीं अधिक हो गई है। देश में सीए एग्जामिनेशन 95 शहरों के 173 केन्द्रों पर साल में दो बार मई व नवम्बर में आयोजित किया जाता है।
 

नियमित पढाई जरूरी
यह मेडिकल और इंजीनियरिंग की तरह ही प्रोफेशनल कोर्स है, इसलिए इसे गंभीरतापूर्वक लेना चाहिए। सीए बनने की चाह रखने वाले को मेहनती और सच्ची लगन वाला होना चाहिए। जो पाठ्यक्रम दिया गया है, उसे पूरी तरह कवर करना चाहिए। संस्थान द्वारा दिए गए स्टडी मैटीरियल का अध्ययन सही तरीके से करना चाहिए। इसमें हर साल बहुत अधिक संख्या में छात्र बैठते हैं, लेकिन बहुत कम स्टूडेंट्स ही सफल हो पाते हैं। इस कारण यह अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की अपेक्षा कहीं कठिन है। इसमें हर दिन कंपनी और टैक्स के नियम बदलते रहते हैं। आपको इन सबकी जानकारी होना बेहद जरूरी है। इस परीक्षा में धैर्य की काफी आवश्यकता होती है, क्योंकि आप चाहकर भी सभी परीक्षा की तैयारी एक साथ नहीं कर सकते हैं। आपको आईपीसी पास करने के बाद तीन वर्ष की ट्रेनिंग के बाद ही फाइनल परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलती है। इस कारण इन तीन वर्षो में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के साथ ही अपनी तैयारी को बेहतर शेप देते रहना चाहिए। कुछ स्टूडेंट्स ट्रेनिंग के दौरान रास्ते से भटक जाते हैं और कुछ पैसे के लालच में पढाई बीच में ही छोड देते हैं या तैयारी के लिए उचित समय नहीं दे पाते हैं। इसकी संख्या इस प्रोफेशन में काफी है। आपके लिए उचित यही होगा कि आप सीए में एडमिशन लेने से पहले ही यह निश्चय कर लें कि फाइनल परीक्षा पास करने के बाद ही नौकरी करूंगा। यदि इस तरह की इच्छाशक्ति के साथ-साथ कठिन मेहनत करने की क्षमता भी आप में है, तो आप इस परीक्षा में अवश्य सफल होंगे।
 

किस तरह के कार्य
कुछ समय पहले वैश्विक स्तर पर अपने बिजनेस को विस्तार देते हुए भारती एयरटेल ने साउथ अफ्रीका में अपना कारोबार स्थापित किया तो उसमें अहम प्लेयर के रूप में एक और शख्स का नाम सामने आया। उन्होंने साउथ अफ्रीका में कंपनी का कारोबार आगे बढाने, इसकी संभावनाओं का आकलन करते हुए इस डील को सफल बनाने में अहम रोल अदा किया। यह शख्स दरअसल पेशे से एक सीए है, लेकिन इस तरह के कारोबार में इनकी भी जरूरत पडी। उनकी तरह देश में कई और सीए भी हैं, जो आज अर्थव्यवस्था को सही दिशा देने में निरंतर सक्रिय हैं। सीए को वैश्विक अर्थव्यवस्था में विकास का सारथी भी कहा जाने लगा है। एक दशक पहले तक सीए का काम खाली अकाउंटिंग तक ही सीमित था, लेकिन जमाना कुछ ऐसा बदला कि बिजनेस के क्षेत्र में होने वाली हर बडी से बडी और छोटी से छोटी डील में वह अहम प्लेयर बन कर उभर रहा है। देश-दुनिया में आए दिन होने वाले व्यवसाय और निरंतर हो रहे आर्थिक विकास में वित्तीय एप्लिकेशन को संभालने और उससे जुडी आवश्यक जानकारी रखने का काम सीए करने लगा है। वह फाइनेंशियल इंफॉर्मेशन, जिसमें बैलेंस शीट भी शामिल है, को सर्टिफाई करता है। अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने, इससे जुडे सिस्टम का ऑडिट और उसे सर्टिफाई करने का काम उसी के जिम्मे होता है। इसके आधार पर ही कोई कंपनी या सरकारी निकाय अपने आगे के भविष्य के बारे में कोई निर्णय लेती है। अकाउंट और फाइनेंस से हट कर देश में प्रचलित विभिन्न तरह के करों के भुगतान के हिसाब-किताब भी कहीं न कहीं सीए ही देखता है। देश में जन-कल्याण से जुडी कई योजनाएं लाई जा रही हैं, मसलन नरेगा की ही बात करें तो यह हर एक पंचायत से लेकर जिला और राज्य स्तर तक फैला है। इसमें आए दिन अनियमितता की शिकायतें आती रहती हैं। इन सबसे बचने और इस योजना की सफलता का आकलन करने के लिए ऑडिट कराने का भी प्रावधान रखा गया है। ऑडिट करने के लिए यहां भी सीए की जरूरत पडती है।
 

अवसर ही अवसर
वर्ष 2008 के बाद से भारत में चार्टर्ड एकाउंटेंट की मांग बहुत तेजी से बढ रही है। विकसित होती अर्थव्यवस्था में इस पाठ्यक्त्रम की काफी आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज भारत में किसी भी अन्य प्रोफेशनलों की अपेक्षा सीए की मांग अधिक है। वित्त और लेखा आउटसोर्सिंग की भी यदि बात की जाए तो केपीओ और बीपीओ के बढते बजार में भी चार्टर्ड अकाउंटेंट का अपना अलग ही महत्व है। एक अनुमान के मुताबिक, फिलहाल भारत में प्रतिवर्ष 9000 से 10,000 छात्र सीए की परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं, जबकि भारत में सीए की मांग इससे कई गुना अधिक है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निजी कंपनियां, बैंक और सरकारी निकाय, सभी को आज सीए की जरूरत पडती है। इसके अलावा पब्लिक अकाउंटिंग के प्रैक्टिशनर के रूप में सीए काम कर सकता है, पार्टनर या स्टाफ मेंबर के रूप में कोई फर्म ज्वॉइन कर सकता है। आयकर, सेवाकर और अप्रत्यक्ष करों की प्रैक्टिस के लिए इनकी जरूरत पडती है।
जेआरसी टीम ( दैनिक जागरण )











Friday, December 10, 2010

  जानदार लोगों का शानदार करियर

 


जानदार लोगों का शानदार करियर
















आजकल युवाओं के पास विकल्पों की कमी नहीं है। वे चाहें तो योग्यता के अनुसार विभिन्न प्रकार के कोर्स कर सकते हैं। यदि आपकी इच्छा कुछ अलग तरह का कोर्स करने की है, जिसमें बेहतर सैलरी के साथ रोमांच भी हो, तो ओशनोग्राफी का विकल्प बेहतर है। इन दिनों इससे संबंधित प्रोफेशनल की काफी मांग है।
 

कोर्स
इसमें यूजी एवं पीजी किया जा सकता है। समुद्र विज्ञान की विभिन्न शाखाओं का विषय के रूप में चयन करके पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर सकते हैं। अधिकतर संस्थानों में प्रवेश के लिए अच्छे अंक होना आवश्यक है।
 

शैक्षिक योग्यता
यह फील्ड साइंस के उन स्टूडेंट्स के लिए है जिनकी गणित में अच्छी पकड है। इस फील्ड में 12वीं के बाद भी प्रवेश किया जा सकता है। गोवा यूनिवर्सिटी से समुद्र विज्ञान में बीएससी कर सकते हैं। ओशनोग्राफी में पीजी कोर्स वही कर सकता है जो इसी विषय में स्नातक की योग्यता रखता है।
 

व्यक्तिगत गुण
इस सेक्टर से जुडे लोगों का अधिकतर समय प्रयोगशालाओं और समुद्र के बीच ही बीतता है। वे हर समय समुद्र की गहराइयों में कुछ नया खोजने में लगे रहते हैं। इस कार्य को वही कर सकता है, जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ समुद्री जल एवं हवाओं से होने वाली परेशानियों का सामना करने में भी सक्षम हो।
 

क्या है काम
इसके विशेषज्ञ समुद्र के बहाव की दिशा और दशा, उसके फिजिकल और केमिकल रिएक्शंस, जलवायु परिवर्तन और उसके समुद्री जीवों पर पडने वाले प्रभाव आदि की जानकारी एकत्र करते हैं। इसकी कई फील्ड हैं, जिनमें विशेषज्ञता हासिल की जा सकती है। जैसे- मैरीन बायोलॉजी, जियोलॉजिकल ओशनोग्राफी, फिजिकल ओशनोग्राफी आदि।
 

क्या है ओशनोग्राफी
ओशनोग्राफी के अंतर्गत समुद्र, समुद्र तटीय क्षेत्रों, नदी मुख, तटीय जल, समुद्री जीवों, समुद्री धाराओं और तरंगों आदि का अध्ययन किया जाता है। इस फील्ड में बायोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेटियोरोलॉजी, जियोलॉजी आदि विज्ञान की कई शाखाओं का उपयोग होता है। यह एक विस्तृत विषय है और इसमें भूगर्भ विज्ञान और मौसम विज्ञान की आवश्यक चीजों के बारे में भी स्टूडेंट को जानकारी दी जाती है। समुद्री विज्ञान की फील्ड में करियर बनाने की चाह रखने वाले इसकी उप शाखाओं समुद्री जीव विज्ञान, भूगर्भ समुद्र विज्ञान, रासायनिक समुद्र विज्ञान आदि में भी भविष्य संवार सकते हैं।
 

चुनौतियों से बढते अवसर
ग्लोबल वार्मिग आज बडी चुनौती के रूप में सामने है। बढते तापमान के कारण हिमग्लेशियरों का पिघलना शुरू हो चुका है और समुद्र के जलस्तर में वृद्घि दिखाई देने लगी है। इस विभीषिका के चलते कुछ छोटे द्वीपों का तो अस्तित्व ही खत्म हो गया है। इस विकराल चुनौती का सामना करने के लिए विश्वस्तर पर शोध किए जा रहे हैं। इस काम के लिए बडी संख्या में समुद्र विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के विशेषज्ञों की आवश्यकता है। इस विषय के अच्छे जानकारों के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध संस्थानों के साथ काम करने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ग्लोबल वार्मिग का संकट दिन प्रतिदिन विकराल होता जा रहा है, ऐसे में आने वाले सालों में भी इस फील्ड के योग्य लोगों के पास बेहतरीन अवसरों की कोई कमी नहीं रहेगी।
 
केमिकल ओशनोग्राफी : इसमें समुद्री जल के संयोजन और उसकी क्वालिटी का आकलन किया जाता है। समुद्र की तलहटी में होने वाले केमिकल रिएक्शन पर नजर रखने के साथ-साथ उस टेक्नोलॉजी की भी खोज की जाती है जिनसे महत्वपूर्ण नई जानकारियां हासिल हो सकती हैं।
 
जियोलॉजिकल ओशनोग्राफी : जियोलॉजिकल ओशनोग्राफर्स का काम समुद्री जल की ऊपरी तह की वास्तविक स्थिति का अध्ययन करना और समुद्र की तलहटी में पाए जाने वाले खनिज पदार्थो के बारे में पता लगाना होता है। ये लोग समुद्र के अंदर की चट्टानों के आकार-प्रकार और उनकी उम्र आदि के बारे में भी जानकारियां हासिल करते हैं।
 
फिजिकल ओशनोग्राफी : यह इस विज्ञान की बहुत महत्वपूर्ण शाखा है। इसमें समुद्र के तापमान, लहरों की गति और चाल, वायु का उस पर पडने वाला असर, ज्वार-भाटा और घनत्व आदि के बारे में अध्ययन किया जाता है। विकासशील देशों में इन प्रोफेशनल्स की विशेष मांग है।
 
मैरीन बायोलॉजी : मैरीन बायोलॉजिस्ट समुद्री जीवजंतुओं की स्थिति, मानव के लिए उनकी उपयोगिता, जीवजंतुओं की शारीरिक संरचना आदि के बारे में जानकारियां हासिल करते हैं। इन दिनों समुद्र में तेल और गैस के नए भंडारों को खोजने के लिए भी मैरीन बायोलॉजिस्ट की सहायता ली जा रही है। अपने देश में इन दिनों इस प्रोफेशन के लोगों की जबरदस्त मांग है।
 

रोजगार के अवसर
ओशनोग्राफी से संबंधित विभिन्न कोर्सो को करने के बाद अच्छा रोजगार मिलना लगभग तय हो जाता है। आप इसका प्रशिक्षण लेकर वैज्ञानिक, इंजीनियर या तकनीशियन के रूप में इस क्षेत्र से संबंधित निजी एवं सार्वजनिक कंपनियों में काम कर सकते हैं। इसका प्रशिक्षण पाने के बाद अधिकतर लोग जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, डिपार्टमेंट ऑफ ओशनोग्राफी, ऑयल इंडिया आदि में नौकरी करते हैं।
 

वेतन
यह फील्ड वेतन के मामले में भी बहुत अच्छी है। अगर अच्छी कंपनियों से करियर की शुरुआत होती है तो सैलरी 15 हजार रुपये प्रतिमाह से अधिक ही होती है, जो कुछ समय के बाद ही इससे कहीं अधिक हो जाती है। इस फील्ड में शोधकार्य के लिए चुने गए लोगों को बहुत अधिक आकर्षक वेतन और सुविधाएं कंपनियां देती हैं।
 

प्रमुख संस्थान
यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास
गोवा यूनिवर्सिटी, गोवा
उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर
अन्नामलाई विश्वविद्यालय
मंगलौर विश्वविद्यालय, कर्नाटक
बरहामपुर यूनिवर्सिटी, उडीसा
( दैनिक जागरण )




.

                 सुनहरा करियर बेहतर सैलरी

 

 

 


सुनहरा करियर बेहतर सैलरी पेट्रोलियम की खपत और उपयोगिता से शायद ही कोई अनभिज्ञ हो। पेट्रोलियम क्षेत्र में नित नई-नई खोजें हो रही हैं और वैकल्पिक ईधन की तलाश में कई नए प्रयोग भी किए जा रहे हैं। अनवरत खोज का ही नतीजा है कि पहले लोग पेट्रोल, केरोसिन, एलपीजी और डीजल को ही जानते थे, लेकिन अब इस कडी में सीएनजी भी शामिल हो गई है। यही कारण है कि इस फील्ड में ट्रेंड प्रोफेशनल्स की काफी आवश्यकता महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, आज अगर यूथ इससे संबंधित कोर्स कर लेते हैं, तो उनके सामने नौकरी की समस्या नहीं रहेगी।
 

कोर्स और योग्यता
इस क्षेत्र में सुनहरा भविष्य बनाना चाहते हैं तो आपके सामने कई तरह के कोर्स मौजूद हैं। आप चाहें तो रिजरवायर, रिफाइनरी और ऑयल ऐंड गैस में बीई और बीटेक कर सकते हैं। बीटेक के बाद संबंधित क्षेत्रों में एमटेक भी किया जा सकता है। इसके अलावा एमटेक डुअल डिग्री करने का भी विकल्प खुला है, जो पांच साल की डिग्री है और इसमें 10+2 पास आउट छात्रों को दाखिला मिल जाता है। देश के प्रमुख संस्थानों द्वारा प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है, जिसमें उत्तीर्ण होने वालों को ही प्रवेश दिया जाता है। इसके साथ ही कुछ चुनिंदा संस्थान एमएससी कोर्स भी संचालित कर रहे हैं। आप चाहें तो ऑयल ऐंड गैस मैनेजमेंट से एमबीए भी कर सकते हैं। बीटेक और बीई में बारहवीं पास छात्र दाखिला ले सकते हैं।
 

बेसिक साइंस की समझ जरूरी
इस फील्ड में अपना भविष्य तलाश रहे युवाओं के लिए इसके कामकाज का तरीका समझना अधिक जरूरी होता है। इनका काम जमीन के अंदर तेल की खोज और खुदाई, नमूनों की जांच, क्रूड ऑयल को अलग-अलग करना, प्रोसेसिंग और प्रोडक्शन करना होता है। ये फील्ड मेकेनिकल माइनिंग और केमिकल इंजीनियरिंग का मिला-जुला रूप है। इसलिए बेसिक साइंस फिजिक्स, जियोलॉजी और केमिस्ट्री के छात्र इस फील्ड को करियर के रूप में अपना सकते हैं।
 

पद और कार्य
यह फील्ड कई शाखाओं में विभाजित है। स्टूडेंट्स अपनी रुचि और योग्यता के अनुरूप जिस भी शाखा को अपनाना चाहें, अपना सकते हैं। इसके प्रमुख क्षेत्र और पद निम्न हैं:
 
प्रोडक्शन इंजीनियर : प्रोडक्शन इंजीनियर तेल के कुंओं की खुदाई होने के बाद अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए ईधन को सतह तक लाने के बेहतर तरीके इजाद करने का काम करते हैं। अगर चाहें तो आप इस पद पर काम कर सकते हैं।
 
ऑयल वेल-लॉग एनालिस्ट : तेल के कुओं की खुदाई के दौरान कई मापों का ध्यान रखना, ऑयल फील्ड के नमूने लेना तथा नमूनों की जांच करना होता है।
 
ऑयल ड्रिलिंग इंजीनियर : इस क्षेत्र के जानकार तेल के नए कुंओं की खुदाई की योजना बनाने के साथ-साथ इस बात की भी स्ट्रेटजी बनाते हैं कि लागत कम से कम आए।
 
ऑयल फै सिलिटी इंजीनियर : जब ईधन सतह पर आ जाता है तो ऑयल फै सिलिटी इंजीनियर उसे अलग करके, उसकी प्रोसेसिंग तथा अन्य स्थानों पर पहुंचाने का काम करते हैं।
 

मांग की अपेक्षा उत्पादन कम
पेट्रोलियम के प्रोडक्शन में भारत काफी पीछे है, लेकिन पेट्रोलियम की खपत के मामले में ये विकसित देशों से टक्कर ले रहा है। देश में मुंबई हाई, कृष्णा-गोदावरी बेसिन और असम के कुछ हिस्सों से पर्याप्त मात्रा में तेल प्राप्त होता है। तेल की खपत की बात की जाए तो भारत विश्व के शीर्ष दस मुल्कों में शामिल है। एक अनुमान के अनुसार भारत में ये तकरीबन 2 मिलियन प्रति बैरल रोजाना के आसपास है। घरेलू मांग की पूर्ति के लिए भारत दुनिया के विभिन्न देशों से लगभग 60 फीसदी तेल का आयात करता है।
 

क्या पढना होगा
मुख्य रूप से अपस्ट्रीम एवं डाउन स्ट्रीम सेक्टर, पेट्रोलियम इंडस्ट्री की शाखाएं हैं। अपस्ट्रीम में ऑयल एवं प्राकृतिक गैस का दोहन किस तरह किया जाए, इसकी जानकारी स्टूडेंट्स को दी जाती है। जबकि डाउन स्ट्रीम सेक्टर में रिफाइनिंग, मार्केटिंग एवं वितरण क्षेत्र में कैंडिडेट्स को प्रशिक्षित किया जाता है। पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स क ो भौतिकी ऐंड इंजीनियरिंग एवं जियोलॉजी के सिद्घांतों के माध्यम से डेवलपमेंट तथा प्रोसेसिंग और पेट्रोलियम रिकवरी के बारे में बताया जाता है। इसके साथ ही मैकेनिक्स, ड्रिलिंग, पर्यावरण संरक्षण जैसे सब्जेक्ट भी पढाए जाते हैं।
 

संभावनाएं
एक बेहतरीन पेट्रो एक्सपर्ट के लिए केवल इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट ही विकल्प नहीं हैं, वह माइंस की खुदाई और उसमें से खनिज और ईधन की खोज का काम भी किया जा सकता है। चाहें एग्रीकल्चर हो, परफ्यूम इंडस्ट्री हो या फिर पेंट्स इंडस्ट्री इस तरह के सभी उद्योग-धंधे पेट्रोलियम पर ही निर्भर करते हैं। लुब्रीकेंट्स, पेस्टीसाइड्स, कीटनाशक, केरोसिन, वैक्स और दूसरी तमाम तरह की चीजें किसी न किसी तरह पेट्रोलियम से ही बनी हैं। मार्केटिंग में भी इसकी संभावनाएं बेहद अधिक हैं। जब यहां पेट्रो प्रोडक्ट का इस्तेमाल ज्यादा है, तो इसका भविष्य भी उज्ज्वल है। यही कारण है कि भारत को आज रिफाइनिंग हब कहा जाने लगा है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, ओएनजीसी, रिलायंस, अदानी एस्सार और केयर्स एनर्जी जैसी कई बडी कंपनियां पेट्रो प्रोफेशनल्स को शानदार सैलरी पैकेज पर नौकरियों के ऑफर दे रही हैं। इस समय तकरीबन भारत में 15 लाख से ज्यादा लोग किसी ने किसी तरह इस फील्ड से जुडे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, केवल भारत में ही हर साल तकरीबन आठ लाख प्रोफेशनल्स की मांग है। विकल्प के रूप में आपके लिए यूरोप के साथ ही खाडी देशों के भी दरवाजे खुले हैं। अब तक इस फील्ड में सिर्फ जियोलॉजिस्ट और केमिकल इंजीनियरों का ही दबदबा था, लेकिन बढती मांग और फील्ड के विस्तार के साथ विभिन्न क्षेत्रों में इससे संबंधित एक्सपर्ट तैयार हो रहे हैं। कहने का आशय यह है कि पेट्रोलियम इंडस्ट्री अब काफी बडा रूप ले चुकी है। यह एक पेट्रोल पंप से रिफाइनरी डिपो और मल्टीनेशनल कंपनियों तक फैल चुका है। आजकल पेट्रोल पंप मॉल्स की शक्लो-सूरत ले चुके हैं, जहां आपको सुपरवाइजर से लेकर मैनेजर तक की जॉब्स मिल सकती हैं।
 

सैलरी
इस तरह के प्रोफेशनल की मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी काफी है। यदि आपके पास पेट्रोलियम सेक्टर से संबंधित डिग्री या डिप्लोमा है और आप अनुभवी हैं तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर पैकेज पर हाथों-हाथ नियुक्ति पत्र मिल सकता है। फेशर्स की सैलरी कंपनी और उसकी योग्यता पर निर्भर करती है। वैसे ट्रेंड एवं फेशर्स भी तीन लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक सलाना पैकेज आसानी से हासिल कर लेते हैं। सरकारी एवं निजी क्षेत्र की कंपनियों में भी आकर्षक सैलरी उपलब्ध है। इस फील्ड के ट्रेंडों का पैकेज विदेशों में कई गुना हो जाता है। यदि विदेश की तरफ रुख करना चाहते हैं, तो अंग्रेजी का बेहतर ज्ञान जरूरी है।
 

कहां से करें कोर्स
आईआईटी, चेन्नई।
लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।
राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, रायबरेली।
यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम ऐंड एनर्जी स्टडीज, देहरादून।
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी।
इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद।
पुणे विश्वविद्यालय, पुणे।
महाराष्ट्र इंडस्ट्री ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे।
पंडित दीन दयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी, गांधी नगर।
अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय अलीगढ, उत्तर प्रदेश।
( दैनिक जागरण )





.